जयराम ने आरोप लगाया कि सरकार लगातार सरकारी स्तर पर कार्यक्रम आयोजित कर भीड़ जुटा रही है, जबकि अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हो रहे हैं। ऐसे में केवल पंचायत चुनाव को लेकर मुख्यमंत्री, मंत्री और अधिकारी अलग-अलग राय क्यों दे रहे हैं। उन्होंने पूछा कि व्यवस्था परिवर्तन के नाम पर यह ऊहापोह क्यों खड़ी की जा रही है। मंत्री दावा करते हैं कि 1600 से ज्यादा सड़कों की मरम्मत हो चुकी है और केवल 10-15 सड़कों का काम अधूरा है, जबकि मुख्यमंत्री कहते हैं कि नागरिकों को सभी सुविधाएं देना हमारी जिम्मेदारी है। जयराम ने सवाल उठाया कि डिजास्टर मैनेजमेंट एक्ट लागू होने के बाद मुख्यमंत्री ने कितने आपदा प्रभावित क्षेत्रों का दौरा किया और 3615 पंचायतों में से कितनी पंचायतें अभी भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं, जिनके आधार पर चुनाव टाले जा रहे हैं।