जयराम ठाकुर ने कहा कि सरकार युक्तिकरण के नाम पर सिर्फ नौकरियां खत्म कर रही है। यह युक्तिकरण बिजली बोर्ड के कर्मचारी और अधिकारियों को भी समझ नहीं आ रहा है। युक्तिकरण के नाम पर नौकरियां खत्म करने के बजाय सरकार बिजली बोर्ड को मजबूत करने के कदम उठाती तो ज्यादा बेहतर था। लेकिन सरकार ने बिजली उत्पादन के क्षेत्र में नवाचार को बढ़ावा देने के बजाय बिजली की कीमतें बढ़ाकर जनता पर बोझ डालना, बोर्ड में काम कर रहे लोगों को नौकरी से निकाल कर बिजली बोर्ड की स्थिति सुधारने की बात कर रही है।
प्रदेश सरकार की नीतियों की वजह से हिमाचल प्रदेश में बिजली उत्पादन के क्षेत्र में कोई सुधार नहीं हो रहा है। पन बिजली कंपनियों को सरकार द्वारा गलत तरीके से मदद करने का भी आरोप लगा है। जिसे भाजपा ने अपने ‘कच्चा चिट्ठा’ के रूप में राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल के माध्यम से प्रदेश वासियों के सामने रखा था। प्रदेश सरकार प्रदेश में चल रहे हाइड्रो पॉवर प्रोजेक्ट के निर्माण को गति नहीं दे पा रही है। जिसकी वजह से हिमाचल प्रदेश की बिजली उत्पादन की संभावनाओं का संपूर्ण दोहन नहीं हो पा रहा है। मुख्यमंत्री से निवेदन है कि प्रदेश और बिजली बोर्ड की आय बढ़ाने के लिए जनता पर टैक्स लगाने और नौकरियों में कटौती करने की बजाय अन्य रास्ते तलाशे और युक्तिकरण के नाम पर आंखों में धूल झोंकने की बजाय तर्क और विवेकपूर्ण बातें करें।