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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा: महाराजा कोठी के आराध्य देवता नरसिंह की पहली जलेब में बांधा सुरक्षा चक्र

Thu, 22 Oct 2026 07:33 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, कुल्लू।

सार

जलेब में पीज के आराध्य देवता जमदग्नि ऋषि, जोंगा के गौरी देवता और हुरगू नारायण, लोट के देवता वीर कैला, कमांद के वीर कैला, पीज के अजयपाल तथा खल्याणी के पांचवीर बराधी सहित अन्य देवी-देवताओं ने भाग लिया। 
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नरसिंह पहली जलेब। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के दूसरे दिन महाराजा कोठी के आराध्य देवता नरसिंह की पहली जलेब में विभिन्न क्षेत्रों के देवी-देवताओं ने भाग लिया। ढोल-नगाड़ों और पारंपरिक वाद्ययंत्रों की थाप पर देवलुओं के साथ देवी-देवताओं के नगर भ्रमण से ढालपुर का माहौल भक्तिमय हो गया। जलेब के दौरान कुल्लू की प्राचीन देव परंपराओं और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत की झलक देखने को मिली। जलेब में पीज के आराध्य देवता जमदग्नि ऋषि, जोंगा के गौरी देवता और हुरगू नारायण, लोट के देवता वीर कैला, कमांद के वीर कैला, पीज के अजयपाल तथा खल्याणी के पांचवीर बराधी सहित अन्य देवी-देवताओं ने भाग लिया। जलेब के दौरान जगह-जगह देवी-देवताओं के अस्थायी शिविरों में भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह को देवताओं की ओर से आशीर्वाद स्वरूप फूल भेंट किए गए। कुल्लू दशहरा उत्सव में जलेब का विशेष धार्मिक महत्व है। देव परंपरा के अनुसार देवी-देवताओं की उपस्थिति में भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह नरसिंह पारंपरिक परिधानों में की पालकी में सवार होते हैं, जबकि आगे-आगे नरसिंह की घोड़ी चलती है। इस परंपरा के माध्यम से मेले की सुख-शांति और सुरक्षा की कामना की जाती है।

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भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने ये कहा
भगवान रघुनाथ के छड़ीबरदार महेश्वर सिंह ने बताया कि मेले के मैदान के चारों ओर सुरक्षा चक्र यानी सुरक्षा सूत्र बांधा जाता है। देव मान्यता के अनुसार इसका उद्देश्य मेले को अनहोनी और बुरी शक्तियों के प्रभाव से सुरक्षित रखना है। यह परंपरा सदियों पुरानी देव आस्था और कुल्लू की विशिष्ट देव संस्कृति से जुड़ी हुई है। अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा में जलेब के माध्यम से प्राचीन धार्मिक परंपराओं का निर्वहन किया जाता है। विभिन्न क्षेत्रों से देवी-देवताओं के आगमन और उनके मिलन से उत्सव की रौनक बढ़ जाती है। देवताओं के साथ पहुंचने वाले देवलुओं की भागीदारी इस आयोजन को विशेष बनाती है। जलेब न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि कुल्लू की ऐतिहासिक परंपराओं, सामाजिक एकजुटता और सांस्कृतिक विरासत को भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी आगे बढ़ाने का माध्यम है।
 

कुल्लू दशहरा के मंच पर दिखी दुनिया की संस्कृति
कुल्लू के रथ मैदान में कहीं एशिया की पारंपरिक नृत्य शैली की झलक दिखी तो कहीं अमेरिका और रूस के कलाकारों ने अपनी संस्कृति के रंग बिखेरे। रंग-बिरंगी पारंपरिक वेशभूषा, लयबद्ध कदमों और लोक संगीत के बीच गुरुवार को अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा का मंच वैश्विक संस्कृति का गवाह बना। रथ मैदान में पहली बार आयोजित ग्लोबल डांस कार्यक्रम में विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियों ने दर्शकों का ध्यान खींचा। इंडोनेशिया, मलयेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अमेरिका और रूस के सांस्कृतिक दलों के साथ हिमाचल प्रदेश और लद्दाख के प्रतिभागियों ने भी अपनी कला का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री मुख्य अतिथि के रूप में मौजूद रहे। तीन दिन तक चलने वाले ग्लोबल डांस में अलग-अलग देशों की सांस्कृतिक विरासत को एक मंच पर लाने का प्रयास किया जा रहा है। विदेशी कलाकारों की प्रस्तुतियों के जरिये दर्शकों को उनकी लोक परंपराओं, नृत्य शैलियों और पारंपरिक पहनावे की झलक देखने को मिल रही है। विधायक एवं कुल्लू दशहरा उत्सव समिति के अध्यक्ष सुंदर सिंह ठाकुर ने कहा कि ग्लोबल डांस के आयोजन से अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा की वैश्विक पहचान मजबूत होगी। इसके माध्यम से विभिन्न देशों और भारतीय राज्यों की सांस्कृतिक परंपराओं को एक मंच मिलेगा और आपसी सांस्कृतिक आदान-प्रदान को प्रोत्साहन मिलेगा।

24 और 26 अक्तूबर को भी सजेगा सांस्कृतिक मंच
24 अक्तूबर को इंडोनेशिया, उज्बेकिस्तान, कजाकिस्तान, अमेरिका, थाईलैंड, मलेशिया, मिस्र, श्रीलंका और नेपाल के कलाकार प्रस्तुतियां देंगे। भारतीय दलों में हिमाचल प्रदेश, लद्दाख, पंजाब, जम्मू-कश्मीर, उत्तराखंड और राजस्थान के कलाकार शामिल होंगे। केरल की कथकली और मणिपुर के पारंपरिक नृत्य भी आकर्षण का केंद्र रहेंगे। भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (आईसीसीआर) के दो विद्यार्थी दल भी कार्यक्रम में भाग लेंगे। वहीं, 26 अक्तूबर को भी नौ अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक दलों के साथ आईसीसीआर के विद्यार्थी दल और विभिन्न भारतीय राज्यों के कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे। इस तरह ग्लोबल डांस के मंच पर विदेशी और भारतीय संस्कृति की विविधता देखने को मिलेगी।
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500 ड्रोन से आसमान में सजी रामायण की झांकी
 कुल्लू दशहरा उत्सव के दौरान वीरवार देर शाम ढालपुर मैदान में 500 ड्रोन की मदद से भव्य ड्रोन शो ने सबका मन मोह लिया। आसमान में एक साथ जगमगाते ड्रोन के जरिये भगवान श्रीराम और हिमाचल की समृद्ध संस्कृति से जुड़ी आकर्षक आकृतियां प्रदर्शित की गईं। करीब आधे घंटे तक चले इस ड्रोन शो में भगवान श्रीराम के वनवास से लेकर लंका दहन तक की कहानी को विभिन्न आकृतियों के माध्यम से जीवंत किया गया। एक साथ 500 ड्रोन ने आसमान में मनमोहक दृश्य उकेरे। इनमें रामायण के प्रसंगों के साथ हिमाचल की संस्कृति की झलक भी देखने को मिली। ढालपुर मैदान के ऊपर आयोजित इस भव्य नजारे को देखने के लिए लोगों में खासा उत्साह रहा। स्थानीय लोगों के साथ विदेशी पर्यटकों ने भी इस यादगार पल को अपने कैमरों में कैद किया। ड्रोन के माध्यम से प्रस्तुत रामायण की झांकी ने अंतरराष्ट्रीय कुल्लू दशहरा उत्सव के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में एक नया आयाम जोड़ा। वहीं, रथ मैदान में आयोजित लेजर लाइटिंग शो भी लोगों के आकर्षण का केंद्र रहा। ड्रोन शो और लेजर लाइटिंग के इन आयोजनों ने उत्सव में आधुनिक तकनीक और पारंपरिक संस्कृति का अनूठा संगम प्रस्तुत किया। रंग-बिरंगी रोशनी और आसमान में उकेरी गई आकृतियों ने कुल्लू दशहरे की भव्यता को और बढ़ा दिया।
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