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Himachal: चिट्टे में दोषी व्यक्ति नहीं लड़ पाएंगे पंचायत चुनाव, आरोप तय होने पर पद से हटेंगे, विधेयक पारित

Thu, 02 Apr 2026 08:12 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों को लेकर सख्त प्रावधानों वाला हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज (संशोधन) विधेयक 2026 (2026 का विधेयक संख्यांक 7) गुरुवार को विधानसभा से पारित हो गया। 
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पंचायत चुनाव। - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश में पंचायतीराज संस्थाओं के चुनावों को लेकर सख्त प्रावधानों वाला हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज (संशोधन) विधेयक 2026 (2026 का विधेयक संख्यांक 7) गुरुवार को विधानसभा से पारित हो गया। नए नियमों के तहत चिट्टा मामलों में आरोप तय होने पर आरोपी को प्रधान को पद से हटाया जाएगा, जबकि दोषी व्यक्ति चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। पंचायत कोरम के लिए अब कुल मतदाताओं की 10 फीसदी उपस्थिति अनिवार्य होगी और परिवार आधारित उपस्थिति मान्य नहीं होगी। जिला परिषद में कोरम एक-तिहाई कर दिया गया है। अवैध कब्जाधारक, सहकारी बैंकों के डिफाल्टर और ऑडिट रिकवरी लंबित लोगों को भी चुनाव लड़ने से अयोग्य घोषित किया गया है।
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लिफ्ट संशोधन विधेयक को विधानसभा में मंजूरी
विधानसभा में गुरुवार को हिमाचल प्रदेश लिफ्ट (संशोधन) विधेयक 2026 (2026 का विधेयक संख्यांक 5) पारित हो गया। विधेयक में प्रदेश में भवनों में लिफ्ट लगाने के लिए अब 2,500 रुपये का पंजीकरण शुल्क निर्धारित किया गया है। लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने प्रदेश लिफ्ट संशोधन विधेयक 2026 को सदन में पेश किया था। इस संशोधन में लिफ्ट के साथ एस्केलेटर और ट्रैवलेटर को भी शामिल किया गया है। वर्ष 2007 के बाद पहली बार नियमों में बदलाव किया जा रहा है। निजी भवन मालिकों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को लिफ्ट लगाने पर यह शुल्क देना होगा, जबकि सरकारी परियोजनाओं पर यह लागू नहीं होगा। नियमों का उल्लंघन करने पर पहली बार 5,000 रुपये और दोबारा उल्लंघन पर 45,000 रुपये तक जुर्माना लगाया जा सकेगा।
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