मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार की कार्यवाही शुरू होते ही सोमवार को बना गतिरोध टूट गया। सोमवार को सदन का सारा काम रोककर स्थगन प्रस्ताव पर चर्चा की गई, वहीं दूसरे दिन मंगलवार को 11 बजे सदन की बैठक की शुरुआत प्रश्नकाल से हुई। हिमकेयर योजना का लाभ मरीजों को न देने का प्रश्न उठाते हुए विपक्ष ने मंत्री के जवाब से असंतोष जताकर हंगामा शुरू किया। इसके बाद विपक्ष सदन से बाहर चला गया। नाचन के भाजपा विधायक विनोद कुमार ने हिमकेयर योजना से संबंधित प्रश्न उठाया। उन्होंने एम्स सहित सभी मेडिकल कॉलेजों में हिमकेयर योजना के माध्यम से इलाज की व्यवस्था होने की बात की गई है, मगर मरीजों का इलाज नहीं हो रहा है। भाजपा विधायक रणधीर शर्मा ने कहा कि योजना के तहत 365 करोड़ की धनराशि लंबित है। लंबित धनराशि कब तक जारी की जाएगी। जिन 25 अस्पतालों को डायलिसिस की सुविधा के लिए हिमकेयर सुविधा शुरू की है, उसके लिए क्या प्रावधान रहे हैं।
स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने जवाब देते हुए विभिन्न स्वास्थ्य संस्थानों को जारी धनराशि का ब्योरा दिया। विपक्ष ने स्वास्थ्य मंत्री के जवाब पर असंतोष जताया। स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल जब इस मुद्दे पर घिर गए तो मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू को जवाब देने के लिए खड़े होना पड़ा। इस बीच विपक्षी सदस्य हंगामा करते हुए सदन से बाहर चले गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि काफी देर से विपक्ष में गुटबाजी शुरू हो गई थी। ये जवाब सुनना नहीं चाह रहे हैं। हिमकेयर योजना को अस्पताल चलाने के लिए लागू किया गया। गॉल ब्लैडर की जो सर्जरी 11 से 15 हजार रुपये में हो जाती है, उसके लिए हिमकेयर ने जो पैकेज दिया, वह बहुत बड़ा घोटाला है। योजना का लाभ कौन लोग उठा रहे हैं। इसमें भाई-भतीजावाद किया गया। निजी लोगों को लाभ देने के लिए पूर्व सरकार ने योजना चलाई। गरीबों के इलाज के लिए सरकार हमेशा तत्पर है। हिमकेयर योजना को बंद नहीं कर रहे, आगे बढ़ रहे हैं। हिमकेयर योजना का बजट पिछले महीने भी जारी किया गया है। किसी का भी इलाज योजना में नहीं रोका जाएगा। योजना के नाम पर पूर्व सरकार के समय में हुए भ्रष्टाचार की परत दर परत खोली जा रही है।