बीते कई सालों से दिसंबर और जनवरी में अच्छी बर्फबारी नहीं हो रही थी, जिससे तौलिये बनाने और बगीचों में गोबर व सुपर फास्फेट खाद डालने का काम भी देरी से हो रहा था। इस कारण पौधों को पूरा पोषण नही मिल पा रहा। पिछले सीजन में भी चिलिंग ऑवर पूरे न होने से रॉयल का उत्पादन घटा था। प्रदेश के 6500 फीट से अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बर्फबारी और बारिश के बाद इस साल जहां सीधी धूप नहीं लगती, वहां चिलिंग प्रक्रिया शुरू हो गई है। आने वाले दिनों में बर्फबारी होने पर तापमान में गिरावट बनी रही तो तय समय पर चिलिंग ऑवर पूरे हो जाएंगे। हिमाचल में सेब के कुल उत्पादन का 90 फीसदी रॉयल डिलीशियस सेब है। पीजीए (प्रोग्रेसिव ग्रोवर्स एसोसिएशन) के अध्यक्ष लोकेंद्र सिंह बिष्ट का कहना है कि समय से हुई बर्फबारी के बाद रॉयल की अच्छी फसल लगने की पूरी उम्मीद है। हालांकि फ्लावरिंग के दौरान उपयुक्त मौसम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
दिसंबर, जनवरी में बर्फबारी के बाद आने वाले दिनों में भी बर्फबारी का पूर्वानुमान है। चिलिंग ऑवर पूरे होने पर रॉयल की बंपर फसल के लिए अनुकूल परिस्थितियां बन रही हैं। इस साल समय पर तौलिये बनाने और खाद डालने का काम शुरू हो गया है, जिससे सेब का उत्पादन बढ़ने के साथ गुणवत्ता में भी सुधार आएगा। - डॉ. कुशाल सिंह मेहता, विषय विशेषज्ञ उद्यान