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Himachal: रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य और किन्नौर जिले से पहली बार नजर आया हॉर्न्ड लार्क पक्षी

Mon, 18 May 2026 01:03 PM IST
Krishan Singh न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला।

सार

 किन्नाैर जिले के रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य ने अपनी बढ़ती जैव विविधता के रिकॉर्ड में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ ली है।
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किन्नौर में हॉर्न्ड लार्क पक्षी। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश के किन्नाैर जिले के रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य ने अपनी बढ़ती जैव विविधता के रिकॉर्ड में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि जोड़ ली है। अभयारण्य के साथ पूरे किन्नौर जिले में पहली बार हॉर्न्ड लार्क पक्षी को देखा गया है और उसकी तस्वीरें भी ली गई हैं। यह महत्वपूर्ण अवलोकन लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए कार्तिक और डॉ. एमवीएलएस प्रवीणा की ओर से संतोष ठाकुर के नेतृत्व में किए गए एक जैव विविधता अन्वेषण के दौरान किया गया। इस टीम में अल्पना भी शामिल थीं, जिन्होंने क्षेत्र प्रलेखन और सर्वेक्षण प्रयासों में सक्रिय रूप से भाग लिया।

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इस प्रजाति का यह पहला औपचारिक और लिखित रिकॉर्ड

विभाग के अनुसार इस क्षेत्र से इस प्रजाति का यह पहला औपचारिक और लिखित रिकॉर्ड है, जिसकी पुष्टि स्पष्ट तस्वीरों के रूप में मौजूद साक्ष्यों से भी हुई है। संतोष ठाकुर ने इस प्रजाति के देखे जाने के संबंध में भूपिंदर राणा, डॉ. नरसिम्हा, डॉ. अभिनव, अक्षय, महेश नेगी और अंकुश ठाकुर के साथ भी चर्चा की, ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या इस क्षेत्र में पहले भी इस प्रजाति का कोई रिकॉर्ड मौजूद था। विस्तृत चर्चा और समीक्षा के बाद सभी इस बात पर सहमत हुए कि  रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य या किन्नौर जिले से हॉर्न्ड लार्क का पहले से कोई भी लिखित रिकॉर्ड मौजूद नहीं है।

पक्षियों के समग्र रिकॉर्ड के लिए महत्वपूर्ण: संतोष ठाकुर

 ब्लॉक वन अधिकारी रकछम संतोष ठाकुर अनुसार इस पक्षी का दिखना न केवल वन्यजीव अभयारण्य के लिए, बल्कि हिमाचल प्रदेश के ऊंचे इलाकों के पक्षियों के समग्र रिकॉर्ड के लिए भी महत्वपूर्ण है। लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए कार्तिक ने इस खोज के बारे में कहा कि  रकछम-छितकुल वन्यजीव अभयारण्य पक्षी जगत और जैव विविधता के मामले में अत्यंत समृद्ध है और इसे संरक्षण पर विशेष ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है। उन्होंने आगे बताया कि किन्नौर जिले के कई दूरदराज के इलाकों की अभी तक ठीक से खोजबीन नहीं हुई है और इन कम ज्ञात क्षेत्रों में अधिक वैज्ञानिक सर्वेक्षणों तथा जैव विविधता अध्ययनों की आवश्यकता पर जोर दिया।

अब 170 से अधिक पक्षी प्रजातियों को दर्ज किया गया: अशोक नेगी

डीसीएफ वन्यजीव सराहन अशोक नेगी ने कहा कि यह खोज किन्नौर जिले के लिए एक और उपलब्धि है, जहां अब 170 से अधिक पक्षी प्रजातियों को दर्ज किया जा चुका है। उन्होंने आगे कहा कि यह क्षेत्र पक्षियों की अद्भुत विविधता का घर है, जिसमें स्थानीय प्रजातियां, प्रवासी पक्षी, और कई ऐसी प्रजातियां शामिल हैं जो ऊंचे इलाकों को अपने प्रजनन स्थल के रूप में इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वन्यजीवों से जुड़े ऐसे महत्वपूर्ण रिकॉर्ड इस क्षेत्र में ईको टूरिज्म को बढ़ावा देने में मदद करेंगे, जिससे स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार और आजीविका के अधिक अवसर पैदा होंगे और साथ ही संरक्षण के प्रति जागरूकता भी बढ़ेगी।
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हॉर्न्ड लार्क आमतौर पर खुले आवासों को करते हैं पसंद: डॉ. माल्या भट्टाचार्य

डॉ. माल्या भट्टाचार्य ने बताया कि हिमालय के इसी तरह के ऊंचे इलाकों में पहले भी हॉर्न्ड लार्क को देखा गया है, हालांकि उनमें से कई को शायद औपचारिक रूप से दर्ज नहीं किया गया होगा या ईबर्ड जैसे प्लेटफॉर्म पर अपलोड नहीं किया गया होगा। उन्होंने बताया कि हॉर्न्ड लार्क आमतौर पर खुले आवासों को पसंद करता है, जैसे कि कम वनस्पति वाले घास के मैदान, अल्पाइन घास के मैदान, कृषि क्षेत्र और सूखे, खुले इलाके। उनके अनुसार चितकुल के आसपास का आवास इस प्रजाति के लिए उपयुक्त परिस्थितियां प्रदान करता है, जहां खुले घास के मैदान और ऊंचे पहाड़ी इलाके, जंगल के छोटे-छोटे हिस्सों के साथ मिले-जुले रूप में मौजूद हैं।
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