कुंजम दरें से समदो तक फैली लगभग पूरी घाटी में शिलालेख (पत्थर पर उकेरी गई आकृतियां) मौजूद हैं। इनमें से अधिकांश स्पीति के निचले हिस्से से मिली हैं। ये शिलालेख साधारण पत्थर के औजारों से चट्टानों पर उकेरी गई हैं। कुछ मामलों में ये बहुत सरल हैं और इनमें केवल एक ही आकृति है जबकि अन्य में मानवाकृति, पशुकृति और ज्यामितीय आकृतियों का एक जटिल संयोजन है। माना जाता है कि यह शिलाशिल्प उस काल के भी हो सकते हैं जो मानव इतिहास का वह प्रारंभिक समय है जब मनुष्य का अस्तित्व तो था लेकिन लेखन कला का आविष्कार नहीं हुआ था।
राज्य संग्रहालय के अध्यक्ष डॉ. हरी चौहान ने बताया कि यह पेट्रोग्लिफ्स 1300 से 1500 ईसा पूर्व यानि 3500 साल पुराने हैं। ये मुख्य रूप से पूर्व-बौद्ध संस्कृति (खासा या अन्य प्राचीन समुदायों) से जुड़े हैं और तिब्बत, लद्दाख और मध्य एशिया की रॉक आर्ट से समानताएं दिखाते हैं। ताबो के पास लरी गांव पेट्रोग्लिफ्स का सबसे बड़ा स्थल है जहां दो हजार से अधिक बोल्डरों पर नौ हजार से अधिक नक्काशियां हैं। इसके अलावा निचली स्पीति में 24 से अधिक स्थलों पर लगभग 1400 बोल्डरों पर छह हजार से अधिक पेट्रोग्लिफ्स पाए गए हैं।
हिमाचल प्रदेश में दुर्लभ धरोहरों को खोजने के लिए 2017 से 2021 तक सर्वे किया गया था। इस दौरान यह प्राचीन शिलाचित्र स्पीति घाटी से प्राप्त हुए थे। स्पीति की किब्बर घाटी से 2017 में 14 हजार 400 फीट की ऊंचाई से 1700 साल पुराने शवागार संस्कृति के अवशेष भी खोजे गए थे। इन्हें संग्रहालय में संरक्षित करके रखा है। -डॉ. हरी चौहान, अध्यक्ष, राज्य संग्रहालय, शिमला