जयराम सरकार के कार्यकाल में अप्रैल 2022 में हिमकेयर योजना की वैधता एक से बढ़ाकर तीन साल कर दी और कमजोर वर्गों के अलावा सामान्य वर्गों को भी योजना में जोड़ दिया। इसके बाद बड़ी संख्या में कर्मचारियों और व्यवसायियों ने भी इलाज का खर्चा बचाने के लिए हिमकेयर कार्ड बना लिए। मंत्रिमंडलीय उपसमिति का मानना है कि जो लोग टैक्स दे रहे हैं, उनके लिए प्रीमियम राशि बढ़ाई जा सकती है। वैधता अवधि एक साल निर्धारित करने से सरकार के लिए योजना को चलाना आसान होगा। मौजूदा समय में हिमकेयर कार्ड अधिकतर मेडिकल कॉलेजों में चल रहे हैं। सरकार ने पिछले दिनों मेडिकल कॉलजों को योजना के तहत लंबित बजट में से कुछ अदायगी भी की है।
350 करोड़ हिमकेयर और 100 करोड़ आयुष्मान की देनदारी
आयुष्मान योजना में करीब 5 लाख परिवारों के कार्ड बने हैं, 1,000 रुपये प्रति परिवार के हिसाब से केंद्र सरकार प्रदेश को सालाना करीब 48 करोड़ देती है। 10 फीसदी राज्य सरकार देती है, जो कुल 55 करोड़ बनते हैं, जबकि अस्पतालों में इलाज के बिल करीब 80 करोड़ के बन जाते हैं। हिमकेयर योजना में भी प्रदेश सरकार को करीब 350 करोड़ और आयुष्मान योजना में 100 करोड़ रुपये की देनदारी निपटानी है।
हिमकेयर योजना के स्वरूप में बदलाव का मामला सरकार के विचाराधीन है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री की अध्यक्षता में गठित मंत्रिमंडल उपसमिति ने इसकी सिफारिशें दे दी हैं। सरकार सुनिश्चित करेगी कि योजना का लाभ जरूरतमंदों को मिले- डॉ. (कर्नल) धनी राम शांडिल, स्वास्थ्य मंत्री