धारीवाल कंपनी को इस महत्वाकांक्षी परियोजना का 1290 करोड़ रुपये का ठेका दिया गया है। इसमें तीन पुलों और दो किलोमीटर सड़क का भी निर्माण किया जा रहा है। 25 मजदूरों और 8 इंजीनियरों की टीम विषम परिस्थितियों में दिन-रात काम में जुटी है। प्रतिदिन करीब 700 बोरी सीमेंट की खपत हो रही है।
शिंकुला टनल न केवल इंजीनियरिंग का चमत्कार साबित होगी, बल्कि यह राष्ट्रीय सुरक्षा, पर्यटन, और स्थानीय विकास का भी सशक्त माध्यम बनेगी। सीमा सड़क संगठन की यह पहल आने वाले समय में भारत की रणनीतिक स्थिति को और भी सुदृढ़ बनाएगी।