कांगड़ा में 3,000, सोलन में 890, मंडी में 250, कुल्लू-लाहौल में 700 और चंबा में 180 ट्रांसफार्मर ठप होने से कई इलाकों में ब्लैकआउट रहा। मंडी जिले में 100 से ज्यादा बिजली के खंभे गिर गए। कुल्लू जिले में दो मकान क्षतिग्रस्त हो गए, 119 को आंशिक नुकसान हुआ है। 59 गोशालाएं क्षतिग्रस्त हुई हैं। कुल्लू में देवता थान मंदिर के एक हिस्से को नुकसान हुआ है। शिमला, कुल्लू और मंडी के कई क्षेत्रों में अंधड़ के साथ बारिश-ओलावृष्टि भी हुई। लाहौल में चोटियों पर बर्फबारी हुई है। प्रदेश में बुधवार देर रात तक 80 से 100 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार से हवाएं चलीं।
शिमला में बुधवार रात 13 जगह पेड़ गिरे। पंद्रह से अधिक वाहन पेड़ों के गिरने से क्षतिग्रस्त हुए हैं। कुछ मकानों की छतें भी उड़ गईं और कई घरों के शीशे टूट गए। आनी में 13 घरों की छतें उड़ गईं। अंधड़-ओलावृष्टि के कारण फसलों को भी भारी नुकसान हुआ है। कई पॉलीहाउस क्षतिग्रस्त हो गए। बगीचों में सेब एवं गुठलीदार पौधों के फूल झड़ गए और एंटी हेलनेट भी क्षतिग्रस्त हो गए हैं। नाहन स्थित एमईएस मंदिर और शमशेर कैंट में वाहनों पर बड़े पेड़ गिर गए। बिजली के 90 ट्रांसफार्मर बंद होने और 25 खंभे टूटने से जिले के कई इलाकों में 12 घंटे से अधिक समय तक ब्लैकआउट रहा।
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चंबा में प्राथमिक पाठशाला तुदा के भवन पर पेड़ गिरने से दो कमरों की छत और रसोईघर क्षतिग्रस्त हो गई। कांगड़ा जिले में पेड़ गिरने से एक दर्जन से अधिक वाहन क्षतिग्रस्त हुए हैं। जिले में 33 गोशालाएं, 15 कच्चे मकान और सात पक्के घरों को नुकसान पहुंचा है। ऊना में जगह-जगह बिजली के खंभे और तार टूट गए। लवाडी-तलमेहड़ा सड़क पर लगभग 13 घंटे यातायात प्रभावित रहा। पेड़ गिरने से सोहारी-टकोली-तलमेहड़ा सड़क पर 11 घंटे, तलमेहड़ा-जोल सड़क पर आठ घंटे यातायात प्रभावित रहा।