राज्य निर्वाचन आयोग ने आगामी पंचायत और नगर निकाय चुनावों को लेकर प्रदेश के जिला उपायुक्तों की तत्परता पर नाराजगी जताई थी। राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से उपायुक्तों को आरक्षण रोस्टर घोषित करने के निर्देश जारी किए गए थे लेकिन किसी भी उपायुक्त ने रोस्टर जारी नहीं किया। आयोग ने चुनाव सामग्री उठाने के निर्देश दिए लेकिन चुनाव सामग्री भी नहीं उठाई गई।
निर्धारित समय में उपायुक्तों की ओर से वोटर लिस्टों का प्रकाशन न करने को भी आयोग ने नियमों का उल्लंघन माना था और उपायुक्तों से इस देरी का कारण पूछा था। जिस पर उपायुक्तों ने सरकार की ओर से प्रदेश में लगाए गए डिजास्टर एक्ट को कारण बताया है। उधर राज्य चुनाव आयोग बीते 17 नवंबर को आदर्श आचार संहिता के एक क्लॉज को लागू कर चुका है। इसके तहत पंचायतों और नगर निकायों की सीमाएं फ्रीज कर दी है जिसके बाद सरकार पंचायतों का पुनर्गठन और पुनर्सीमांकन नहीं कर सकती। चुनाव आयोग के इस फैसले को लेकर प्रदेश सरकार कानूनी सलाह ले रही है।