उन्होंने कहा कि सरकार ने नशीली दवाओं के दुरुपयोग पर अंकुश लगाने और नशे की लत से प्रभावित युवाओं को समाज की मुख्यधारा में वापस लाने के लिए रणनीति अपनाई है। यह रणनीति युवाओं में मादक द्रव्यों के सेवन को रोकने और पहले से ही नशे की लत में फंसे लोगों के पुनर्वास पर केंद्रित है। राज्य के स्वास्थ्य संस्थानों में परामर्श और शीघ्र हस्तक्षेप के लिए 108 नए दिशा केंद्र स्थापित किए गए हैं, जहां आशा कार्यकर्ताओं, चिकित्सक और मनोचिकित्सकों को विशेष प्रशिक्षण दिया जा रहा है।
वर्तमान में कुल्लू, ऊना, हमीरपुर और कांगड़ा में पुरुषों के लिए चार नशामुक्ति एवं पुनर्वास केंद्र संचालित हैं, जबकि कुल्लू ज़िले में रे क्रॉस सोसायटी की ओर से महिलाओं के लिए एक अलग केंद्र संचालित किया जा रहा है। जन जागरूकता प्रयासों के तहत राष्ट्रीय नशा निवारण अभियान के तहत 5.76 लाख से अधिक लोगों को नशीली दवाओं के दुरुपयोग के दुष्प्रभावों के बारे में जागरूक किया गया है। इस अभियान में 5,660 गांवों और 4,332 शैक्षणिक संस्थानों को शामिल किया गया है, जिसमें किशोरों, युवाओं, महिलाओं और आम जनता पर विशेष ध्यान दिया गया है।