बीते वर्ष दिसंबर माह में इन पक्षियों की संख्या 200 के करीब रही जो कि इस बार बढ़कर 300 का आंकड़ा पार कर चुकी है। फिलहाल किसी नई प्रजाति का इस्तकबाल नहीं हुआ है। बर्फबारी के बाद कुछेक नई प्रजातियों के आने की भी उम्मीद है। प्रतिवर्ष हजारों किलोमीटर का लंबा सफर तय करके यह पक्षी आकाश मार्ग से समूहों में यहां पहुंचते हैं।
विभागीय आंकड़ों के अनुसार छह प्रजातियों के 336 प्रवासी पक्षी रेणुकाजी वेटलैंड पहुंच चुके हैं। यह पक्षी रेणुका झील के अंतिम छोर पर बने विशेष टापुओं पर अपनी अठखेलियां व जल क्रीड़ा करते दिखाई दे रहे हैं। रेणुका वेटलैंड का शांत वातावरण इन परिंदों को बहुत भाता है। यहां इन्हें किसी भी प्रकार का कोई खतरा नहीं है और यहां भोजन भी इन्हें प्रचुर मात्रा में उपलब्ध होता है। इस कारण प्रति वर्ष प्रवासी परिंदों की कई प्रजातियां यहां सर्दियों के दौरान दस्तक देतीं हैं। साथ लगते जटोन बैराज में भी यह प्रवासी पक्षियों को जल क्रीड़ाएं करते दिखाई दिए हैं।
रेणुका घाटी में पक्षी साइबेरिया, इटली, चीन, रूस, कुवैत, सउदी अरब, अफगानिस्तान व ब्राजील आदि स्थानों से यहां आते हैं। ये करीब तीन माह का समय यहां बीतने के बाद फरवरी माह के अंतिम सप्ताह तक लौट जाएंगे। - राकेश कुमार, कार्यवाहक आरएफओ, वन्य प्राणी विहार रेणुकाजी।