रजनीश बंसल ने कहा कि ईडी के सहायक निदेशक ने उन्हें गिरफ्तारी का झूठा वारंट दिखाया। एक बार तो संजीव प्रभाकर प्रताड़ना से तंग आकर आत्महत्या करने जा रहा था। तब हम वकील के पास गए। उसके बाद सीबीआई के पास जाने का निर्णय लिया गया। संजीव प्रभाकर ने बताया कि डंडे मारे गए। सदमे से माता की मौत हो गई, भाई कोमा में चला गया। माता ने यहां तक कहा कि गहने बेचकर पैसे दे दो। भूपिंद्र शर्मा ने आरोप लगाया कि जब अधिकारियों ने सारी हदें लांघ दी तो चंडीगढ़ ईडी कार्यालय में शिकायत की गई और डीआईजी ईडी ने 5 मिनट के भीतर एक्शन लेते हुए टीम का गठन किया।
केंद्र सरकार की ओर से अनुसूचित जाति, जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों की मदद के लिए छात्रवृत्ति योजना शुरू की गई, लेकिन इसमें अधिकारियों ने घोटाला किया। छात्रवृत्ति के लिए आवेदन करने वाले पोर्टल में कई खामियां मिलीं। निजी शिक्षण संस्थानों ने फर्जी तरीके से विद्यार्थियों के नाम पर बैंक खाते खोले और सरकारी धनराशि हड़प ली। आय से अधिक संपत्ति मामले में प्रवर्तन निदेशालय ने भी कई आरोपियों की चल-अचल संपत्तियां अटैच की गईं। इसमें दस करोड़ से ज्यादा की संपत्ति अटैच करने के अलावा 14 बैंक खातों में जमा राशि भी इसमें शामिल है। ईडी इस मामले में सीबीआई की ओर से दर्ज एक एफआईआर के आधार पर धन शोधन निवारण अधिनियम के प्रावधानों के तहत कार्रवाई कर रहा है।