हिमाचल प्रदेश में नए भवन और अन्य निर्माण कार्य तय नियमों के मुताबिक ही होंगे। कौन सा एरिया भवन निर्माण के लिए सुरक्षित होगा, इसके लिए मैपिंग की जाएगी। केंद्र सरकार के सहयोग से प्रदेश में जमीन की मैपिंग होगी। इसमें यह पता लगाया जाएगा कि कौन सी जगह भवन निर्माण और प्रोजेक्ट के लिए सुरक्षित होगी। शहरी क्षेत्रों में 1000 और टीसीपी एरिया में 600 स्क्वेयर मीटर जमीन खरीदने वाले लोग अब टीसीपी के दायरे में आएंगे। इन्हें निर्माण कार्य के लिए टीसीपी की अनुमति लेनी होगी। इन्हें निर्माण करने से पहले नक्शा पास कराना होगा। यह जानकारी टीसीपी मंत्री राजेश धर्माणी ने आपदा पर चर्चा के दौरान दी।
उन्होंने कहा कि पूर्व भाजपा सरकार ने विधानसभा चुनाव से ठीक पहले भवन निर्माण कार्य के लिए एनओसी की शर्त को हटा दिया। राजनीतिक फायदा लेने के लिए ऐसा किया गया। आज हालात सबके सामने हैं। उस दौरान लोगों ने मर्जी से मकानों का निर्माण कर दिया। आज भवन और डंगे गिर रहे हैं। अगर एनओसी वाली शर्त लागू रहती तो लोग नियमों के तहत भवनों का निर्माण करते। उन्होंने कहा कि अब इस तरह की गलती को न दोहराया जाए।
उन्होंने कहा कि हिमाचल में ज्यादातर बड़े प्रोजेक्ट नालों और खड्डों के साथ बने हैं। बदल फट रहे हैं। सरकार और लोगों को भारी नुकसान हो रहा है। अब निर्माण कार्य इस तरह करने की जरूरत है, जहां खतरा न हो। उन्होंने कहा कि जीएसटी कौंसिल की बैठक में भी जलवायु परिवर्तन को लेकर चर्चा हुई थी। यह परिवर्तन हिमाचल में ही नहीं, देश-विदेश में हो रहा है।