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हिमाचल प्रदेश: राज्यपाल कविंद्र गुप्ता बोले- नौतोड़ जमीन पर जल्द होगा फैसला, उपायुक्त से मांगी रिपोर्ट

Thu, 01 Oct 2026 09:57 PM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

लोकभवन शिमला में कविता कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत में राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी से  नौतोड़ के विषय पर दूसरी बार मुलाकात की है। मामले पर काम शुरू कर दिया गया है।
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राज्यपाल कविंद्र गुप्ता। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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 राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने कहा कि नौतोड़ का मामला उनके विचाराधीन है। इस पर जल्द कार्यवाही जाएगी। संबंधित जिलों के उपायुक्तों से अब तक बैठकों और पूरे मामले की विस्तृत जानकारी मांगी गई है। गुरुवार को लोकभवन शिमला में कविता कार्यक्रम में शामिल होने के बाद मीडिया से बातचीत में राज्यपाल ने कहा कि उन्होंने राजस्व, बागवानी एवं जनजातीय विकास मंत्री जगत सिंह नेगी से इस विषय पर दूसरी बार मुलाकात की है। मामले पर काम शुरू कर दिया गया है। राज्यपाल ने कहा कि नौतोड़ के प्रावधानों के तहत पात्र लोगों को किस तरह लाभ दिया जा सकता है। इस पर मंथन जारी है। मामला लोकभवन के संज्ञान में है और सभी पहलुओं की जांच के बाद जल्द निर्णय लिया जाएगा। बता दें कि नौतोड़ का मुद्दा जनजातीय क्षेत्रों में लंबे समय से लंबित है। मंत्री जगत सिंह नेगी पहले राज्यपाल से इस मामले में जल्द निर्णय लेने का आग्रह कर चुके हैं। अगस्त में नेगी ने दावा किया था कि उपमंडल स्तर पर करीब 20 हजार नौतोड़ आवेदन और दावे लंबित हैं। उनका कहना रहा है कि पात्र परिवारों को जमीन मिलने से जनजातीय क्षेत्रों में आजीविका के अवसर बढ़ेंगे और पलायन को रोकने में भी मदद मिल सकती है।

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जून में नेगी ने राज्यपाल से मुलाकात कर जनजातीय क्षेत्रों के पात्र लोगों को नौतोड़ वन भूमि के आवंटन की अनुमति देने का आग्रह किया था। राज्य सरकार की ओर से वन (संरक्षण) अधिनियम, 1980 के तहत लागू प्रतिबंधों से छूट की मांग भी की गई है। मामला अनुसूचित क्षेत्रों से जुड़े सांविधानिक प्रावधानों और वन कानूनों के कारण कानूनी पहलुओं से भी जुड़ा हुआ है। लोकभवन की ओर से पहले नौतोड़ जमीन के लिए पात्रता तय करने के लिए स्पष्ट, एक समान और पारदर्शी दिशा-निर्देश तैयार करने की आवश्यकता जताई गई थी। अब उपायुक्तों से मांगी गई रिपोर्ट के आधार पर पुराने मामलों, अब तक की कार्रवाई और कानूनी स्थिति की समीक्षा की जा रही है। इसके बाद पात्र लोगों को लाभ देने के लिए आगे की प्रक्रिया तय होने की संभावना है।

राज्यपाल बोले-सरकार के साथ हूं
राज्यपाल ने मुख्यमंत्री सुक्खू के दिल्ली में शिक्षा में पारदर्शिता से जुड़े उपायों में राज्यपाल की भूमिका को लेकर उठाए सवाल पर भी स्थिति स्पष्ट की। राज्यपाल ने कहा कि वह अपने सांविधानिक पद की गरिमा बनाए रखते हुए निर्वाचित सरकार का पूरा समर्थन करते हैं। सरकार और लोकभवन को अपनी-अपनी जिम्मेदारियों के दायरे में काम करते हुए आगे बढ़ना चाहिए। बता दें कि प्रदेश विधानसभा ने तीन सितंबर को मानसून सत्र के दौरान हिमाचल प्रदेश राज्य विश्वविद्यालय (संशोधन) विधेयक 2026 पारित किया था। सरकार ने इसे विश्वविद्यालयों में शासन और निगरानी व्यवस्था मजबूत करने से जुड़ा कदम बताया था, जबकि भाजपा विधायकों ने इसके प्रावधानों को लेकर विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता और सरकारी नियंत्रण से जुड़े सवाल उठाए थे।

साहित्य को सेवा, संवेदना और राष्ट्रभक्ति से जोडे़ : कविंद्र
 सेवा पखवाड़ा 2026 के तहत लोकभवन और हिमाचल साहित्य एवं संस्कृति मंच के संयुक्त तत्वावधान में वीरवार को साहित्य सेवा शीर्षक से काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल कविंद्र गुप्ता ने की। इस अवसर पर विशेष रूप से आमंत्रित हिमाचल प्रदेश के स्वतंत्रता सेनानियों के परिवारों को राज्यपाल ने सम्मानित किया। राज्यपाल ने समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि यह कार्यक्रम केवल एक काव्य गोष्ठी नहीं, बल्कि साहित्य को संवेदना, सेवा और राष्ट्रभक्ति से जोड़ने का अवसर भी है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज की आत्मा की आवाज है, जबकि कविता शब्दों की सजावट से आगे बढ़कर मानवीय भावनाओं, सामाजिक चेतना और राष्ट्र की आकांक्षाओं को अभिव्यक्त करती है।
 
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एक सार्थक कविता न केवल हृदय को स्पर्श करती है, बल्कि लोगों को समाज और देश के लिए योगदान देने की प्रेरणा भी देती है। जब कवि सामाजिक सरोकारों को स्वर देते हैं, प्रकृति का उत्सव मनाते हैं, राष्ट्रीय नायकों के शौर्य का स्मरण करते हैं, युवाओं को प्रेरित करते हैं अथवा सामाजिक चुनौतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं, तो उनका रचनात्मक योगदान भी सामाजिक सेवा का एक रूप बन जाता है। स्वतंत्रता सेनानियों के योगदान और बलिदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि जिस भारत की उन्होंने कल्पना की थी, उसका निर्माण उनके साहस, त्याग और संघर्ष की नींव पर हुआ है। हिमाचल प्रदेश ने भी स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण योगदान दिया और अनेक वीर देशभक्तों ने ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष में भाग लिया। इससे पहले, राज्यपाल ने स्वयं भी एक कविता का पाठ किया, जिसे उपस्थित जनसमूह ने सराहा। कथाकार, उपन्यासकार एवं कवि एसआर हरनोट ने राज्यपाल का स्वागत किया। इस अवसर पर नैना देवी विधानसभा क्षेत्र के विधायक रणधीर शर्मा भी उपस्थित रहे।
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