प्रदेश में बीते तीन साल के दौरान निजी संस्थानों में दाखिला लेने वाले विद्यार्थियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। बेहतर अंग्रेजी माध्यम, आधुनिक शिक्षण पद्धति और अभिभावकों की बढ़ती अपेक्षाएं इसके पीछे प्रमुख कारण माने जा रहे हैं। शिमला, मंडी, कांगड़ा और सोलन जैसे शहरी जिलों में यह प्रवृत्ति अधिक स्पष्ट है, जबकि ग्रामीण इलाकों में भी धीरे-धीरे निजी स्कूलों की पकड़ मजबूत हो रही है। सरकारी स्कूलों में बुनियादी सुविधाओं की कमी, शिक्षकों की अनुपस्थिति और प्रतिस्पर्धी माहौल का अभाव बच्चों और अभिभावकों को निजी स्कूलों की ओर धकेल रहा है।
ऐसे में प्रदेश सरकार को अब नई शिक्षा नीति के अनुरूप डिजिटल और कौशल आधारित शिक्षण सुधारों की दिशा में काम करने की आवश्यकता है। सांख्यिकी ईयर बुक में यह भी बताया गया है कि विद्यार्थियों की संख्या में सबसे बड़ी गिरावट ग्रामीण क्षेत्रों में दर्ज की गई है। छोटे स्कूलों में विद्यार्थी संख्या 20 से भी कम रह जाने के कारण कई जगहों पर स्कूलों के विलय या बंद होने की स्थिति बनी हुई है। दिलचस्प बात यह है कि विद्यार्थियों की संख्या में बड़ी गिरावट के बावजूद शिक्षकों की संख्या में केवल 699 की ही कमी आई है। वर्ष 2020-21 में जहां शिक्षकों की कुल संख्या 66,402 थी, वहीं 2024-25 तक यह घटकर 65,703 रह गई।