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Himachal Pradesh: प्राकृतिक कृषि उत्पादों की एमएसपी तय कर हिमाचल बना देश के लिए मॉडल, इन्होंने की सराहना

Mon, 14 Apr 2025 05:44 PM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

देश के जाने माने खाद्य नीति विश्लेषक और कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पूरे देश को हिमाचल मॉडल अपनाने का भी सुझाव दिया है। पढ़ें पूरी खबर...
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : सोशल मीडिया।
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विस्तार
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प्राकृतिक कृषि उत्पादों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) निर्धारित कर हिमाचल ने देश के लिए मॉडल स्थापित किया है। यह कहना है देश के जाने माने खाद्य नीति विश्लेषक और कृषि विशेषज्ञ देविंदर शर्मा का। उन्होंने कहा है कि एमएसपी तय होने से हिमाचल के किसान जैविक खेती के प्रति प्रोत्साहित होंगे और रसायनों के प्रयोग से भूमि की उर्वरता भी प्रभावित नहीं होगी। शर्मा ने किसानों की आय बढ़ाने के लिए पूरे देश को हिमाचल मॉडल अपनाने का भी सुझाव दिया है।

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जैविक कृषि उत्पादों की खेती के लिए किसानों को प्रोत्साहित करने की नीति पूरे देश के लिए पथ प्रदर्शक है। जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए हिमाचल ने गाय और भैंस के दूध के लिए उच्च खरीद मूल्य की घोषणा की थी और इस बजट में इसमें वृद्धि की है। गाय के दूध के लिए खरीद मूल्य 45 रुपये से बढ़ा कर 51 रुपये और भैंस के दूध के लिए 55 रुपये से बढ़ा कर 61 रुपये प्रति लीटर दाम तय किया है।
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एमएसपी के लिए कानूनी गारंटी देश का ज्वलंत मुद्दा है, पंजाब के किसान संगठन एक वर्ष से इसका मांग कर रहे हैं। इन बीच हिमाचल ने जैविक उत्पादों के लिए उच्च एमएसपी तय की है। साल 2025-26 के लिए केंद्र की ओर से गेहूं के लिए घोषित 24.25 रुपये प्रतिकिलो एमएसपी के मुकाबले हिमाचल ने जैविक गेंहू के लिए 60 रुपये एमएसपी घोषित किया है, जो 35.75 रुपये अधिक है।

मक्की के लिए केंद्र की ओर से घोषित 22.25 रुपये के मुकाबले हिमाचल ने जैविक मक्की के लिए 40 रुपये प्रति किलोग्राम दाम घोषित किया है यह 17.75 रुपये अधिक है। गेहूं और मक्की को खरीद केंद्रों तक ले जाने के लिए दो रुपये प्रतिकिलो परिवहन सब्सिडी की भी घोषणा की है। जैविक कच्ची हल्दी के लिए 90 रुपये प्रतिकिलो दाम घोषित किया है जबकि बाजार भाव 25 से 30 रुपये प्रतिकिलो है। 2025-26 में एक लाख लोगों को जैविक खेती से जोड़ने का लक्ष्य भी प्रदेश की दीर्घकालीन सोच दिखाता है।

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सैलानी भी जैविक उत्पादों के प्रति आकर्षित होंगे
देविंदर शर्मा का कहना है कि यह देखना होगा कि जैविक उत्पादों की मार्केटिंग कैसे की जाती है। स्वास्थ्यवर्धक उत्पादों की ब्रांडिंग से प्रदेश की एक अलग छवि बनेगी। उम्मीद है एचपीएमसी के होर्डिंग और आउटलेट पर जैविक उत्पाद दिखेंगे। सैलानी भी जैविक उत्पादों के प्रति आकर्षित होंगे। नीति आयोग भी जैविक उत्पादों की खेती को प्रोत्साहित कर रहा है लेकिन उत्पादकों का लाभ सुनिश्चित करने और ग्राहकों को सही कीमत पर उत्पाद मिले यह तय करना जरूरी है। यह बिचौलियों के खिलाफ सख्ती से संभव होगा।
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