यदि शिक्षकों का जवाब संतोषजनक नहीं पाया गया तो उनके खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी और वार्षिक वेतनवृद्धि (इंक्रीमेंट) भी रोकी जा सकती है। शिक्षा विभाग ने इस वर्ष की बोर्ड परीक्षाओं के परिणामों का स्कूल और विषयवार विश्लेषण शुरू किया है। जिन विद्यालयों में लगातार कमजोर परिणाम सामने आए हैं, वहां शिक्षण व्यवस्था और शैक्षणिक गतिविधियों की भी समीक्षा की जा रही है।
स्कूल शिक्षा निदेशक आशीष कोहली ने कहा कि विद्यार्थियों के बेहतर शैक्षणिक प्रदर्शन के लिए शिक्षकों की जवाबदेही तय करना आवश्यक है। इसी उद्देश्य से कमजोर परीक्षा परिणाम वाले मामलों में जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू की गई है। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए लगातार प्रयास जारी हैं। ऐसे में बोर्ड परीक्षाओं में अत्यंत कम परिणाम देने वाले शिक्षकों से स्पष्टीकरण लेना आवश्यक है, ताकि भविष्य में विद्यार्थियों के शैक्षणिक स्तर में सुधार सुनिश्चित किया जा सके।