हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने 180 मेगावाट की बैरा स्यूल जलविद्युत परियोजना के संबंध में यथास्थिति बनाए रखने के आदेश दिए हैं। न्यायाधीश अजय मोहन गोयल की अदालत ने इस मामले की सुनवाई की। एनएचपीसी की ओर से हाईकोर्ट में हिमाचल सरकार के फैसले को चुनौती दी गई है। राज्य मंत्रिमंडल ने बीते दिनों 40 साल की समय अवधि पूरी होने पर परियोजना का अधिग्रहण करने का फैसला लिया है। हाईकोर्ट में 26 मई को इस मामले पर आगामी सुनवाई होगी।
बैरा स्यूल जलविद्युत परियोजना एनएचपीसी की ओर से शुरू की गई पहली परियोजना है। इसे 1981 में चालू किया गया था। इसकी स्थापित क्षमता 180 मेगावाट है और इसमें 60 मेगावाट की तीन इकाइयां हैं। प्रदेश सरकार ने बीते दिनों केंद्रीय उपक्रमों सतलुज जल विद्युत निगम (एसजेवीएन) और नेशनल हाईड्रो इलेक्ट्रिक पावर कॉरपोरेशन (एनएचपीसी) को आवंटित पांच बिजली प्रोजेक्टों को अपने अधीन लेने का फैसला लिया है। सरकार के इस फैसले को एनएचपीसी की ओर से हाईकोर्ट में चुनौती देते हुए अधिवक्ता तुषार मेहता ने वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से अपनी दलीलें दी। चंबा जिला में रावी नदी की सहायक नदी बैरा स्यूल पर यह परियोजना स्थापित है।