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Himachal News: पंचायत प्रतिनिधियों के त्यागपत्र को मंजूरी देने से पहले होगी जांच, सरकार ने बनाए नियम, जानें

Sun, 20 Oct 2024 11:45 AM IST
अंकेश डोगरा अमर उजाला ब्यूरो, शिमला

सार

हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज संशोधन नियम 2024 की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद शनिवार से लागू हो गई। अब पंचायतीराज प्रतिनिधियों के त्यागपत्र को मंजूरी देने से पहले अब कारणों की जांच अनिवार्य होगी।
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सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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पंचायतीराज प्रतिनिधियों के त्यागपत्र को मंजूरी देने से पहले अब कारणों की जांच अनिवार्य होगी। पंचायत प्रधान, उप प्रधान, पंचायत समिति सदस्य और जिला परिषद सदस्यों के पद से त्यागपत्र को लेकर सरकार ने नए नियम तय कर दिए हैं।

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हिमाचल पंचायतीराज संशोधन नियम 2024 की अधिसूचना हुई लागू 
प्रतिनिधि के फर्जी हस्ताक्षर, अनैतिक दबाव और मिलीभगत को रोकने के लिए यह व्यवस्था की गई है। इसे लेकर हिमाचल प्रदेश पंचायतीराज संशोधन नियम 2024 की अधिसूचना राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद शनिवार से लागू हो गई। पंचायतीराज विभाग के सचिव की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार पंचायत प्रधान, उपप्रधान और वार्ड सदस्यों को अपना त्यागपत्र जिला पंचायत अधिकारी या खंड विकास अधिकारी को सौंपना होगा। यदि त्यागपत्र खंड विकास अधिकारी को सौंपा गया है तो वह तुरंत इसे अपनी टिप्पणी के साथ जिला पंचायत अधिकारी को भेजेंगे।

फर्जी हस्ताक्षर, अनैतिक दबाव और मिलीभगत रोकने के लिए की नई व्यवस्था 
जिला पंचायत अधिकारी त्यागपत्र के स्वैच्छिक और वैध होने की पुष्टि के लिए इसकी जांच करवाएंगे। इसके अलावा जिला पंचायत अधिकारी की ओर से त्यागपत्र स्वीकार करने से पहले कभी भी प्रधान, उपप्रधान या सदस्य अपना त्यागपत्र वापस भी ले सकता है। पंचायत समिति सदस्य को अपना त्यागपत्र खंड विकास अधिकारी के माध्यम से संबंधित उपायुक्त को लिखित में सौंपना होगा। उपायुक्त त्यागपत्र को लेकर सक्षम अधिकारी से जांच करवाएंगे और संतुष्ट होने पर ही त्यागपत्र स्वीकार करेंगे। जिला परिषद पदाधिकारियों को अपना त्यागपत्र निदेशक पंचायतीराज विभाग अथवा उपायुक्त को सौंपना होगा। त्यागपत्र स्वैच्छिक रूप से दिया गया है या नहीं, इसे लेकर निदेशक या उपायुक्त अपने स्तर पर जांच करवाएंगे और संतुष्ट होने के बाद त्यागपत्र स्वीकार करेंगे।

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पंचायतीराज संस्थाओं के प्रतिनिधियों के त्यागपत्र को मंजूरी देने से पहले जांच की व्यवस्था लागू की गई है। जांच से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि फर्जी हस्ताक्षर, अनैतिक दबाव अथवा मिली भगत से त्यागपत्र तो नहीं दिलवाया जा रहा है- राजेश शर्मा, सचिव, पंचायतीराज
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