फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हिमाचल: साल ने थामी सांसों की डोर, वाहनों के प्रदूषण को सबसे ज्यादा अवशोषित करता है ये पेड़; शोध में खुलासा

Thu, 06 Nov 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा हर्षित शर्मा, संवाद न्यूज एजेंसी, शिमला।

सार

हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्ययन में खुलासा हुआ है कि साल (शोरिया रोबस्टा) का पेड़ वाहनों के प्रदूषण को सबसे ज्यादा अवशोषित करता है। पढ़ें पूरी खबर...
विज्ञापन
साल (शोरिया रोबस्टा) का पेड़ - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

हिमाचल प्रदेश में पाया जाने वाला साल (शोरिया रोबस्टा) का पेड़ वाहनों के प्रदूषण को सबसे ज्यादा अवशोषित करता है। नाहन से पांवटा साहिब तक के राष्ट्रीय राजमार्ग-07 के किनारे उगे पेड़ों पर हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग के अध्ययन में खुलासा हुआ है। सड़कों के किनारे के पेड़-पौधे वाहन प्रदूषण की सबसे ज्यादा मार झेल रहे हैं।

विज्ञापन

यह अध्ययन हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग की कल्याणी सुप्रिया, हिमाचल प्रदेश विश्वविद्यालय के पर्यावरण विज्ञान विभाग की रिया चौहान और पर्यावरण विज्ञान विभाग डॉ. वाईएस परमार बागवानी एवं वानिकी विश्वविद्यालय नौणी के आरके अग्रवाल ने किया है। अध्ययन दिसंबर से जून तक नाहन से पांवटा साहिब के बीच 40 किलोमीटर लंबे हिस्से में किया गया। सड़क के दोनों ओर से पौधों के नमूने तीन अलग-अलग दूरियों, सड़क से पांच मीटर के भीतर, पांच से दस मीटर के बीच और दस मीटर से अधिक दूरी पर लिए गए।

इस क्षेत्र में चार प्रमुख पौध प्रजातियां गूलर, सिंदूरी, साल और सफेदा के पत्तों पर अध्ययन किया गया। पत्तियों में जल की मात्रा, क्लोरोफिल (हरा रंग), अम्लीयता (पीएच मान) और एस्कॉर्बिक अम्ल (विटामिन सी) से यह पता किया गया कि कौन सा पौधा प्रदूषण ज्यादा सहन कर सकता है। नतीजों में पाया गया कि चारों पौधे संवेदनशील श्रेणी में आते हैं क्योंकि इनका सहनशीलता सूचकांक 11 से कम रहा। लेकिन इनमें साल पेड़ का मान सबसे अधिक था। यह पेड़ अपने भीतर प्रदूषण को झेलने और वातावरण को स्वच्छ करने की अधिक क्षमता रखता है। इसके बाद सफेदे का प्रदर्शन मध्यम पाया गया, जबकि गूलर, सिंदूरी सबसे कमजोर निकले।

धूल और धुएं को झेलने की क्षमता
अध्ययन में देखा गया कि जो पौधे सड़क के बिल्कुल पास उगते हैं, उनमें क्लोरोफिल और पीएच का स्तर घटता है। यानी प्रदूषण उनके पत्तों को प्रभावित करता है। इन पौधों में जल की मात्रा और एस्कॉर्बिक अम्ल थोड़ा बढ़ जाता है। इससे पता चलता है कि पौधे खुद को बचाने की कोशिश करते हैं, लेकिन लंबे समय में नुकसान से नहीं बच पाते।
विज्ञापन

सड़क के किनारे हरित पट्टी बनाने का सुझाव
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि साल के वृक्ष की पत्तियां बड़ी, मोटी और घनी होती हैं। यह वृक्ष धूल और धुएं को रोकने में सबसे कारगर है। इस कारण इसे सड़क किनारे हरित पट्टी लगाने के लिए सबसे उपयुक्त माना गया है। सफेदे को भी कुछ हद तक उपयोगी माना गया है। गूलर, सिंदूरी के पौधे प्रदूषण से जल्दी प्रभावित हो जाते हैं। शोध में यह सुझाव दिया गया है कि हिमाचल जैसे पहाड़ी प्रदेश में गाड़ियों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में यहां सड़क किनारे हरियाली की दीवारें खड़ी करना जरूरी है। इन हरित पट्टियों से न केवल वायु की गुणवत्ता बेहतर होगी बल्कि यात्रियों को ताजी हवा और सुंदर दृश्य भी मिलेंगे।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें