राज्य बिजली बोर्ड के अध्यक्ष के कक्ष में बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने पूह से काजा तक 66 केवी ट्रांसमिशन लाइन के निर्माण से जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की। बैठक में सामने आया कि बार-बार के प्रयासों के बावजूद अधीक्षण अभियंता (ईएस डिज़ाइन) हमीरपुर की ओर से इस परियोजना के लिए जारी निविदाएं योग्य बोलीदाताओं की भागीदारी आकर्षित करने में विफल रही। निविदा आमंत्रण सूचना (एनआईटी) में क्षेत्रीय परिस्थितियों का ध्यान नहीं रखा गया। इससे वर्तमान लागत अनुमानों के तहत परियोजना वित्तीय रूप से अव्यावहारिक पाई गई।
बैठक में बताया गया कि मौजूदा एनआईटी में प्रस्तावित लागत पिछले दौर की बोली में पाई गई न्यूनतम (एल वन) दरों से लगभग 50 फीसदी कम है। ऐसे में क्षेत्रीय परिस्थितियों और यथार्थवादी बाजार दरों के अनुरूप एनआईटी को फिर से तैयार करने के लिए निदेशक (वित्त एवं प्रशासन) अनुराग चंद्र शर्मा की अध्यक्षता में एक उच्च-स्तरीय समिति का गठन करने का फैसला लिया गया। समिति को एक संशोधित, व्यवहार्य निविदा दस्तावेज़ तैयार करने का कार्य सौंपा गया है। इसमें दुर्गम भूभाग, रसद संबंधी बाधाओं और दूरस्थ पूह-काजा क्षेत्र में निर्माण से जुड़ी सामग्री की लागत को ध्यान में रखने को कहा गया है।
बता दें कि केंद्रीय ऊर्जा मंत्रालय ने दिसंबर 2023 में आरडीएसएस योजना में 66 केवी पूह-समधो-काजा लाइन का निर्माण कार्य का जिम्मा सौंपा है। इस पर केंद्र सरकार ने 90 फीसदी अनुदान देना है और 10 फीसदी खर्च बिजली बोर्ड को करना है।