पीएम मोदी की मांग के बाद पूलों की मांग बढ़ी है। खासकर मंदिरों के लिए इनका उपयोग किया जा रहा है। पीएम नरेंद्र मोदी की मांग पर पूलें बनाने की जिम्मेदारी छतरी उपतहसील के सडोचा गांव की रमेशु देवी और खंधीधार गांव की नेहा देवी को मिली। उन्होंने स्वयं सहायता समूह की अन्य महिलाओं के साथ मिलकर उन्होंने लगभग 200 जोड़ी पूलें तैयार कीं। समय पर निर्देश पूरा करने के लिए सभी महिलाओं ने दिन-रात मेहनत की। रमेशु देवी याद करती हैं कि जब जयराम ठाकुर ने बताया कि यह प्रधानमंत्री का विशेष आग्रह है तो हमें विश्वास ही नहीं हुआ। यह हमारे जीवन का सबसे बड़ा दिन था। उनके कहने पर तीन चार साल पहले ये पूलें बनाई थीं।
क्या हैं पूलें
‘पूलें’ सिर्फ चप्पल नहीं हैं, बल्कि हिमाचल की सांस्कृतिक पहचान का हिस्सा हैं। इसकी तली भांग के रेशों और ऊपरी हिस्सा रंग-बिरंगे ऊनी धागों से बुना जाता है। ये पैरों को गरम रखती हैं। एक जोड़ी बनाने में 2 से 3 दिन का समय लगता है। रमेशु और नेहा देवी जैसी महिलाएं वर्षों से इसे आजीविका का साधन बनाए हुए हैं।