हाइपोथर्मिया वह स्थिति है जब नवजात शिशु का शरीर तापमान सामान्य से खतरनाक रूप से कम हो जाता है। नवजातों में सामान्य तापमान 36.5 से 37.5 डिग्री सेल्सियस होता है। इससे नीचे तापमान जाने पर बच्चे की जान को खतरा पैदा हो सकता है। नवजात शिशु, विशेषकर प्री-मैच्योर और कम वजन वाले बच्चे, अपनी शरीर की गर्मी खुद नहीं बना पाते। थोड़ी सी ठंड भी उनके लिए जानलेवा साबित हो सकती है। इनके संभावित खतरों में शिशु को सांस लेने में परेशानी,उसका दूध न पी पाना, संक्रमण का खतरा, गंभीर स्थिति में मृत्यु शामिल है।
इससे बचाव के लिए शिशु के जन्म के तुरंत बाद उसे निकू में इन्फेंट वार्मर वी 2 का उपयोग किया जाता है। वहीं इससे लगातार तापमान की निगरानी भी होती है। संस्थान निकू के लिए 20 नए अत्याधुनिक इन्फेंट वार्मर वी 2 खरीद रहा है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर दो से ढाई करोड़ तक खर्च होने की संभावना है। इन उपकरणों के लगने से हर साल सैकड़ों नवजात शिशुओं को मां की कोख जैसी सुरक्षित गर्माहट मिल सकेगी और उनकी जान बचाई जा सकेगी।
वर्तमान में एम्स बिलासपुर का पीडियाट्रिक विभाग हमीरपुर, मंडी, ऊना, कुल्लू,चंबा,कांगड़ा और आसपास के जिलों के लिए प्रमुख रेफरल सेंटर है। सीमित संसाधनों के कारण कई बार गंभीर नवजातों को चंडीगढ़ या दिल्ली रेफर करना पड़ता था। वहीं, अब पंजाब, जम्मू तक से मरीज एम्स बिलासपुर का रुख कर रहे हैं। इससे विभाग में भी मरीजों का दबाव बढ़ा है। मरीजों की संख्या में जैसे-जैसे बढ़ोत्तरी हो रही है,वैसे-वैसे संस्थान की सुविधाओं में भी इजाफा किया जा रहा है। नियोनेटल इंटेंसिव केयर यूनिट और स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट में अब 20 नए इन्फेंट वार्मर वी 2 लगने से इनकी क्षमता बढ़ जाएगी। लेबर रूम से निकलते ही गंभीर नवजात को तुरंत लाइफ-सपोर्ट तापमान मिलेगा,सुविधा के अभाव में बाहरी राज्यों को रेफर करने की मजबूरी में भारी कमी आएगी।