याचिका में आरोप लगाया था कि संबंधित प्रोजेक्ट प्रमोटर (एसजेवीएन) उनकी भूमि का उपयोग करना चाहता है, लेकिन उन्हें उचित मुआवजा नहीं दिया जा रहा है। याचिकाकर्ताओं का कहना था कि उन्हें उन दरों पर सेल डीड करने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जो उन्हें स्वीकार्य नहीं हैं। उन्होंने मांग की थी कि उनकी जमीन का अधिग्रहण भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, पुनर्व्यवस्थापन और पारदर्शिता का अधिकार अधिनियम 2013 के तहत किया जाए। प्रतिवादी प्रोजेक्ट प्रमोटर एसजेवीएन की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि कई याचिकाकर्ताओं ने पहले ही आपसी सहमति से तय दरों पर अपनी जमीन बेच दी है। याचिकाकर्ताओं ने बातचीत के बाद अपनी जमीन बेचने के लिए स्वेच्छा से सहमति दी है।