हिमाचल प्रदेश सरकार में पीडब्ल्यूडी और शहरी विकास मंत्री ने कहा, "मैंने वेणुगोपाल जी को वास्तविक स्थिति से अवगत कराया और विचारधारा के बारे में उनकी चिंताओं को दूर किया और उन्हें आश्वासन दिया कि हम पार्टी के समर्पित और वफादार सिपाही हैं और ऐसा कुछ भी नहीं करेंगे जो पार्टी लाइन के खिलाफ हो।" हिमाचल प्रदेश में उत्तर प्रदेश मॉडल का अनुसरण किए जाने के दावों के बारे में पूछे जाने पर सिंह ने कहा कि इसे मीडिया में गलत परिप्रेक्ष्य में उजागर किया गया। सिंह ने कहा, "मीडिया ने यह गलत धारणा पेश की। हाईकमान ने इस पर संज्ञान लिया। उन्हें इस बारे में भी चिंता थी, जिसे उन्होंने व्यक्त किया और हमने कांग्रेस हाईकमान के समक्ष तथ्य और आंकड़े रखकर उन्हें आश्वस्त किया।"
पिछले बुधवार को हिमाचल प्रदेश के मंत्री ने संवाददाताओं से कहा कि स्ट्रीट वेंडरों, खासकर खाद्य पदार्थ बेचने वालों के लिए अपनी दुकानों पर अपना पहचान पत्र प्रदर्शित करना अनिवार्य होगा। उन्होंने कहा कि यह निर्णय योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा घोषित इसी तरह के निर्देश से प्रेरित है। सिंह की टिप्पणी से खुद को अलग करते हुए राज्य सरकार ने एक बयान में कहा कि उसने ऐसा कोई निर्णय नहीं लिया है, जिसके तहत स्ट्रीट वेंडरों के लिए अपनी दुकानों पर नामपट्टिका या अन्य पहचान प्रदर्शित करना अनिवार्य हो।
सिंह ने कहा कि राज्य में प्रवासियों की बढ़ती संख्या के बारे में कई स्थानीय लोगों द्वारा व्यक्त की गई "आशंकाओं" को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया। फेसबुक पर अपनी टिप्पणी पोस्ट करने पर उन्हें इंडिया ब्लॉक के कई नेताओं की आलोचना का भी सामना करना पड़ा। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के हिमाचल प्रदेश प्रभारी राजीव शुक्ला ने कहा था कि उन्होंने इस मुद्दे पर सिंह और मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू से चर्चा की है।
पिछले गुरुवार को जम्मू में पत्रकारों से बातचीत में शुक्ला ने कहा, "उन्हें लाइसेंस दिए जाएंगे और उनका नियमन किया जाएगा, ताकि पुलिस उन्हें परेशान न करे। निर्धारित स्थानों पर पहचान के लिए आधार कार्ड और लाइसेंस जैसी चीजें जरूरी होंगी, लेकिन उन्हें मालिक के तौर पर अपना नाम बताने वाला कोई साइन बोर्ड लगाने की जरूरत नहीं है।"