एशियाई विकास बैंक (एडीबी) से वित्तपोषित इस परियोजना का उद्देश्य प्रदेश में बागवानी गतिविधियों का विस्तार कर किसानों की आय बढ़ाने के अवसर उपलब्ध करवाना है। अधिकारियों ने बताया कि परियोजना के पहले चरण में 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। इसमें से करीब 2,700 हेक्टेयर क्षेत्र विकसित किया जा चुका है, जबकि 1,900 हेक्टेयर में पौधारोपण का कार्य पूरा हो गया है। शेष क्षेत्र में पौधारोपण जनवरी-फरवरी, 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना के पहले चरण में 3,000 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए 331 क्लस्टरों को अंतिम रूप दिया गया है। इन क्लस्टरों के माध्यम से करीब 10,646 किसान परिवारों को लाभ मिलने की उम्मीद है। बैठक में बागवानी विभाग के निदेशक सतीश कुमार, एचपी शिवा परियोजना निदेशक समीर सिंह, प्रोक्योरमेंट अधिकारी मनोज शर्मा और सात जिलों के उपनिदेशक उपस्थित रहे।
घटिया पौधे खरीदे तो होगी कार्रवाई
बागवानी मंत्री ने कहा कि किसी भी परिस्थिति में निम्न गुणवत्ता वाले पौधों की खरीद नहीं की जानी चाहिए। नर्सरी संचालकों को भी तकनीकी मानकों और निर्धारित विशिष्टताओं के अनुरूप उच्च गुणवत्ता वाली पौध सामग्री उपलब्ध करवाने के निर्देश दिए गए। बैठक में सौर बाड़बंदी, खेतों की तैयारी, ड्रिप सिंचाई और लिफ्ट सिंचाई योजनाओं समेत विभिन्न निर्माण कार्यों और आधारभूत सुविधाओं की प्रगति की भी समीक्षा की गई। एचपी शिवा परियोजना के दूसरे चरण की तैयारियां भी शुरू हो गई हैं। बैठक में बताया गया कि दूसरे चरण के लिए सर्वेक्षण का काम जारी है और करीब 2500 हेक्टेयर क्षेत्र की पहचान की जा चुकी है।