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हिमाचल प्रदेश: कहां भूकंप आने की अधिक संभावना, अध्ययन बताएगा; आईआईटी मंडी बनाएगा भूकंप पूर्वानुमान मॉडल

Wed, 17 Dec 2025 05:00 AM IST
अंकेश डोगरा राकेश राणा, मंडी।

सार

इसरो की ओर वित्तपोषित एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परियोजना भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी में शुरू की गई है। यह परियोजना हिमालयी क्षेत्र में 6 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंपों के लिए समय-स्वतंत्र पूर्वानुमान मॉडल विकसित करने पर केंद्रित है। पढ़ें पूरी खबर...
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आईआईटी मंडी परिसर - फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
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विस्तार
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हिमाचल प्रदेश की भूकंपीय संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मंडी में एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक परियोजना शुरू की गई है। इसरो की ओर वित्तपोषित यह परियोजना हिमालयी क्षेत्र में 6 या उससे अधिक तीव्रता वाले भूकंपों के लिए समय-स्वतंत्र पूर्वानुमान मॉडल विकसित करने पर केंद्रित है। शुरूआत में यह परियोजना मंडी में केंद्रित रहेगी। इस अध्ययन से यह साफ होगा कि कहां किस तीव्रता के साथ भूकंप का असर हो सकता है। इसके अलावा कहां भूकंप आने की अधिक संभावना है। यह भी पता चलेगा। यहां के बाद यह अध्ययन अन्य जगहों पर आगे बढ़ेगा।

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इस परियोजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इसमें पारंपरिक भूकंपीय आंकड़ों के साथ उपग्रह आधारित ग्लोबल नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम यानी जीएनएसएस और इंटरफेरोमेट्रिक सिंथेटिक एपर्चर रडार यानी इन-सार तकनीकों का समन्वित उपयोग किया जाएगा। जीएनएसएस के माध्यम से पृथ्वी की सतह पर प्रति वर्ष कुछ मिलीमीटर तक की प्लेट गति को मापा जा सकता है। जबकि इन-सार तकनीक से बड़े क्षेत्रों में भूमि के उठने, धंसने और भ्रंश रेखाओं पर तनाव के संकेतों की पहचान संभव होती है। इससे भूकंप से पहले होने वाले दीर्घकालिक भू-गतिकीय परिवर्तनों को समझने में मदद मिलेगी।

आईआईटी मंडी के सिविल और पर्यावरण अभियांत्रिकी स्कूल में संचालित इस परियोजना की अवधि 36 महीने तय की गई है। इस दौरान उच्च स्तरीय डेटा संग्रह, मॉडलिंग और सत्यापन का कार्य किया जाएगा। अध्ययन के तहत मंडी और आसपास के क्षेत्रों में भू-संरचना, ढलानों, चट्टानों के प्रकार और पुराने भूकंपीय आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। परियोजना का नेतृत्व आईआईटी मंडी के महेश रेड्डी कर रहे हैं। जबकि डेरिक्स पी शुक्ला और धन्या जे सह-प्रधान अन्वेषक के रूप में जुड़े हैं।

भूकंप की दृष्टि से उच्च और अत्यधिक जोखिम वाला क्षेत्र है हिमाचल
हिमाचल भूकंप की दृष्टि से उच्च और अत्यधिक जोखिम वाला क्षेत्र माना जाता है। इस परियोजना से प्राप्त वैज्ञानिक निष्कर्ष राज्य और केंद्र सरकार की आपदा प्रबंधन योजनाओं के लिए अहम इनपुट प्रदान करेंगे। भूकंप संभावित क्षेत्रों की प्राथमिकता तय करने, भूकंपरोधी भवन निर्माण मानकों को अद्यतन करने और बुनियादी ढांचे की मजबूती के लिए यह मॉडल उपयोगी होगा। इसके साथ ही, यह अध्ययन भविष्य में प्रारंभिक चेतावनी प्रणालियों और जोखिम मानचित्रण को भी सशक्त बना सकता है।
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परियोजना के तहत शोध सहयोगियों की नियुक्ति की जा रही है, जिससे रिमोट सेंसिंग, जियोइन्फॉर्मेटिक्स और भूकंप विज्ञान के क्षेत्र में प्रशिक्षित मानव संसाधन तैयार होगा। इसके बाद इसमें कार्य शुरू होगा। विस्तृत अध्ययन के बाद मॉडल बनाया जाएगा। इसमें भूंकप संबंधी स्थिति स्पष्ट होगी। -डेरिक्स पी. शुक्ला, एसोसिएट प्रोफेसर, आईआईटी मंडी।
 
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