न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने माना कि शुल्क में यह भारी बढ़ोतरी हिमाचल प्रदेश बिजली (शुल्क) अधिनियम, 2009 की धारा 11(2) के खिलाफ है। अधिनियम की धारा 11(2) के तहत राज्य सरकार बिजली शुल्क की दरों में संशोधन तो कर सकती है, लेकिन एक बार में यह वृद्धि पहले से निर्धारित दरों के 50 फीसदी से अधिक नहीं होनी चाहिए। चूंकि, 11 फीसदी का 50 फीसदी अधिकतम 5.5 फीसदी होता है, इसलिए कुल शुल्क 16.5 फीसदी से ज्यादा नहीं होना चाहिए था। सरकार की ओर से इसे सीधे 25 और फिर 37.50 फीसदी करना कानूनन गलत प्रतीत होता है। बता दें, बिजली शुल्क बढ़ोतरी के खिलाफ हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं। इससे पहले भी कोर्ट याचिकाओं पर अलग-अलग सुनवाई करते हुए अपना फैसला सुना चुका है। 23 अप्रैल को हाईकोर्ट सभी लंबित याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करेगा।