हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट में सोमवार को शिमला के बहुचर्चित 4 साल के युग हत्या मामले में सुनवाई हुई। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश राकेश कैंथला की खंडपीठ ने दोनों पक्षों की दलीलों को सुनने के बाद मामले को सुरक्षित रख लिया है।
अपीलकर्ताओं की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता ने आरोपियों के व्यवहार, उम्र और परिवार की स्थिति को देखते हुए अदालत से मृत्यु दंड न दिए जाने की मांग की। वहीं प्रदेश सरकार की ओर से पेश अधिवक्ता ने अपीलकर्ताओं की दलीलों का खंडन करते हुए कहा कि अपराध की गंभीरता को देखते हुए आरोपियों की मृत्यु दंड की सजा को बरकरार रखा जाए।
उन्होंने अदालत को बताया कि दोषी व्यक्ति मासूम बच्चे के जान-पहचान वाले थे। दोषियों की ओर से यह अपराध जल्दबाजी में नहीं किया गया है, बल्कि रातों-रात पैसे कमाकर अमीर बनने के लिए किया गया है। उम्र को देखते हुए आरोपियों को यह पता था कि वह एक जघन्य अपराध कर रहे हैं। 4 साल के मासूम की हत्या करते वक्त जो दरिंदगी की गई, ऐसे अपराध गंभीर श्रेणी में आते हैं। उन्होंने अदालत से मांग की है कि जिला न्यायालय की ओर से पारित फैसला, जिसमें अपराधियों को मृत्यु दंड की सजा सुनाई गई है, को बरकरार रखा जाए।