हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने तेजाब हमले के दो दोषियों के उस आवेदन को खारिज कर दिया है, जिसमें उन्होंने अपनी 10 साल की जेल की सजा को निलंबित कर जमानत पर रिहा करने की मांग की थी। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश रंजन शर्मा की खंडपीठ ने टिप्पणी करते हुए कहा कि भारतीय दंड संहिता की धारा 326-ए के तहत आने वाला अपराध अत्यंत गंभीर प्रकृति का है। यह किसी महिला की शारीरिक अखंडता और उसके सम्मान को पूरी तरह प्रभावित करता है। ऐसे गंभीर मामलों में सजा को निलंबित करने के लिए बेहद सख्त मानकों का पालन किया जाना चाहिए। अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए दोषियों को कोई भी राहत देने से साफ इन्कार कर दिया।