शीर्ष अदालत ने राज्य सरकार को फैसले का अनुपालन करने के लिए चार महीने का समय दिया था। वहीं, दूसरी ओर न्यायाधीश ज्योत्स्ना रिवाल दुआ की अदालत ने अनुबंध के आधार पर सेवाएं दे चुके दर्जनों कर्मचारियों (मित्तल कुमार और अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश) की ओर से दायर याचिकाओं का निपटारा करते हुए राज्य सरकार को आदेश दिया है कि वह याचिकाकर्ताओं की अनुबंध सेवा अवधि को वार्षिक वेतन वृद्धि, वरिष्ठता, पदोन्नति और अन्य परिणामी लाभों के लिए जोड़ने के मामलों पर सुप्रीम कोर्ट की ओर से तय की गई समयावधि के भीतर विचार करे।
अदालत ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि राज्य सरकार की ओर से बनाए गए प्रदेश भर्ती और सेवा शर्तें अधिनियम, 2024 को देवेंद्र कुमार एवं अन्य बनाम हिमाचल प्रदेश राज्य मामले में उच्च न्यायालय की ओर से पहले ही असांविधानिक घोषित कर निरस्त किया जा चुका है। राज्य सरकार ने हाईकोर्ट के इस फैसले को उच्चतम न्यायालय में चुनौती दी थी। शीर्ष अदालत ने 29 जुलाई 2026 को राज्य सरकार की अपील खारिज कर दी थी और इस संबंध में कर्मचारियों को लाभ प्रदान करने के लिए सरकार को चार महीने की समयावधि प्रदान की थी।