निर्धारित समय सीमा के भीतर बिल पास न होने के कारण अस्पतालों के खिलाफ प्राप्त शिकायतों के विवरण की विस्तृत रिपोर्ट भी तलब की। मामले की अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होगी। अदालत ने आदेश दिया है कि अगली सुनवाई पर स्वास्थ्य सचिव और अन्य संबंधित उच्चाधिकारी व्यक्तिगत रूप से अदालत में उपस्थित रहें। कोर्ट को बताया गया कि योजना का खर्च केंद्र और राज्य के बीच 90:10 के अनुपात में साझा किया जाता है। हिमाचल के करीब पांच लाख परिवारों के लिए केंद्र की देनदारी 49.71 करोड़ और राज्य की हिस्सेदारी 5.52 करोड़ रुपये बनती है। अदालत ने केंद्र सरकार को निर्देश दिया है कि वह उन मामलों पर स्पष्टीकरण दें, जहां खर्च तय सीमा से अधिक हो जाता है, ताकि अस्पतालों के लंबित बिलों का भुगतान किया जा सके। सरकार की ओर से बताया गया कि हिमकेयर योजना के तहत लंबित बिलों के मामले में राज्य सरकार ने पैनल में शामिल निजी अस्पतालों की विजिलेंस जांच कराने पर विचार किया है।