हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने राज्य के संबंधित मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों में कार्यरत वरिष्ठ रेजिडेंट और ट्यूटर विशेषज्ञ की चयन प्रक्रिया पर सरकार को एक हलफनामा दायर करने के निर्देश दिए हैं। अदालत ने साथ ही इस हलफनामे में सहायक दस्तावेजों को भी पेश करने के लिए कहा है। न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने कहा कि यह हलफनामा संबंधित मेडिकल कॉलेज और संस्थान के प्राचार्य की ओर से आमंत्रित आवेदन के आधार पर चयनित वरिष्ठ रेजिडेंट, ट्यूटर विशेषज्ञ के दावे के समर्थन में होना चाहिए।
न्यायालय ने सरकार से स्थिति स्पष्ट करने को कहा है कि फील्ड पोस्टिंग किस के लिए जरूरी है और किसके लिए नहीं। अदालत ने कहा कि केवल शिक्षक ही अनुभव के हकदार हैं। उन्हें कोई फील्ड पोस्टिंग नहीं दी जाती है, जबकि चिकित्सा अधिकारी या सीधे चयनित उम्मीदवार जो स्नातकोत्तर पूरा करने के बाद नए सरकारी मेडिकल कॉलेजों या संस्थानों में वरिष्ठ रेजिडेंट या ट्यूटर विशेषज्ञ के रिक्त पदों पर तैनात होते हैं, उन्हें फील्ड पोस्टिंग माना जाता है और यह शिक्षण अनुभव के लिए नहीं गिना जाता है, बल्कि केवल एक वर्ष की अनिवार्य परिधीय सेवाओं के लिए गिना जाता है। मामले की अगली सुनवाई 23 जून को होगी। सरकार की ओर से दलील दी गई कि किसी कर्मचारी की ओर से बांड का सख्ती से क्रियान्वयन किया जाना चाहिए, जिसके आधार पर उसे राज्य सरकार द्वारा प्रायोजित स्नातकोत्तर पाठ्यक्रम में प्रवेश दिया जाता है। इस मामले को लेकर हाईकोर्ट में कई याचिकाएं दायर की गई हैं।