हिमाचल में बंदरों के उत्पात से कृषि और बागवानी को हो रहे करोड़ों के नुकसान पर समूचा सदन चिंतित दिखा। राज्यपाल अभिभाषण पर चरचा के दौरान पहले कई सदस्यों ने यह मसला उठाया। फिर मुख्यमंत्री ने उठाए जाने वाले कदमों की जानकारी दी। विधानसभा अध्यक्ष बृजबिहारी लाल बुटेल ने भी विशेष उल्लेख के तहत अपनी ओर से सरकार को एक-दो साल के भीतर निर्णायक कदम उठाने को कहा।
उन्होंने कहा कि आज लगभग हर चुनाव क्षेत्र में यह दिक्कत है। बंदरों की बढ़ती आबादी के कारण कृषि क्षेत्र सिमट रहा है। उन्होंने आग्रह किया कि इस बारे में एक अध्ययन करवाने की जरूरत है कि बंदरों की नसबंदी अब तक सफल क्यों नहीं रही है? इस बारे में सदन के सभी सदस्य अपने सुझाव दे सकते हैं।
बंदरों से खेतीबाड़ी खतरे में
बुटेल ने माना कि पिछली सरकार ने इस दिशा में कई गंभीर प्रयास किए, लेकिन अब तक लक्षित सफलता नहीं मिली है। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने कहा कि बंदरों से खेतीबाड़ी खतरे में है। धार्मिक मान्यता के कारण केवल नसबंदी ही एकमात्र हल है। इसलिए इस बारे में और ज्यादा नसबंदी केंद्र खोलकर एक व्यापक अभियान चलाने की जरूरत है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि एक जगह बंदर पकड़कर दूसरी जगह छोड़ने पर रोक लगाई जाएगी। इस अभियान के लिए केंद्र सरकार से भी आर्थिक मदद उपलब्ध करवाने का आग्रह किया जाएगा, क्योंकि यह बड़े खर्चे का काम है। इस कार्य के लिए सरकार को समाज की भी भागीदारी लेनी होगी।
राज्यपाल अभिभाषण पर पेश धन्यवाद प्रस्ताव में किन्नौर के विधायक जगत सिंह नेगी ने नसबंदी अभियान में किसी बड़े घोटाले की आशंका जताते हुए इसकी जांच की मांगी थी। हालांकि, इस बारे में मुख्यमंत्री ने कुछ नहीं कहा।