उहल नदी के उफान पर आने से बरोट स्थित रिजर्वायर में पहुंचा पानी।
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चौहारघाटी के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश से ऊहल और लंबाडग नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने और बाढ़ जैसे हालात बनने से दो प्रमुख जल विद्युत परियोजनाएं प्रभावित हो गई हैं। 110 मेगावाट शानन और 66 मेगावाट क्षमता वाली बस्सी परियोजना में रविवार देर रात से विद्युत उत्पादन पूरी तरह बंद है। बरोट स्थित रिजर्वायरों में भारी मात्रा में मलबा, लकड़ियां और सिल्ट भर जाने से उत्पादन ठप करना पड़ा। दोनों परियोजनाओं को अब तक लगभग 40 लाख मिलियन यूनिट जनरेशन का नुकसान हुआ है, जिसकी अनुमानित कीमत दो करोड़ रुपये बताई जा रही है।
सिल्ट का स्तर सामान्य पांच हजार पीपीएम से बढ़कर 40 हजार पीपीएम तक पहुंच गया। बस्सी प्रोजेक्ट में करीब 45 लाख रुपये का नुकसान हुआ है, जबकि शानन प्रोजेक्ट को एक करोड़ से अधिक का नुकसान झेलना पड़ा। मंगलवार को भी उत्पादन न होने से बिजली संकट की आशंका बनी हुई है। मूसलाधार बारिश से बरोट स्थित रिजर्वायर में सिल्ट का स्तर बढ़ जाने के कारण शानन प्रोजेक्ट का विद्युत उत्पादन रोकना पड़ा। पानी की शुद्धता बहाल होने के बाद ही उत्पादन शुरू किया जाएगा। -
भूपेंद्र सिंह, एसई शानन प्रोजेक्ट
बस्सी प्रोजेक्ट में करीब 50 घंटे से उत्पादन बंद रहने पर 45 लाख का अनुमानित नुकसान हुआ है। शानन प्रोजेक्ट से पानी की आपूर्ति न होने के कारण बस्सी परियोजना भी प्रभावित हुई। -
इंजीनियर दीप्ती भट्ट, आरई बस्सी प्रोजेक्ट