मामला पीएनबी की ढालपुर शाखा (कुल्लू) का है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (एसीबी) शिमला शाखा ने मंडी सर्कल प्रमुख राजीव खन्ना की शिकायत पर 11 अप्रैल 2015 को आरोपियों के खिलाफ आईपीसी की धारा 420, 467, 468 और 471 के साथ धारा 120-बी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 13 (2), 13 (1) (डी) में मामला दर्ज किया था। आरोप लगे कि साल 2010 से 2012 की अवधि के दौरान तत्कालीन प्रबंधक ने एजेंटों और बिचौलियों के साथ मिलकर फर्जी राजस्व दस्तावेजों और गैर-भार प्रमाण पत्र (एनईसी) पर 41 फसल ऋण स्वीकृत कर दिए। जांच में सामने आया था कि 41 केसीसी में से लेख राज और धर्मचंद के ऋण आवेदनों पर तस्वीर उनकी लगाई गई थी, जबकि ऋण दस्तावेजों पर हस्ताक्षर किसी और के थे। अभियोजन पक्ष के मुताबिक दोषी एएस एसके बोध सहित अन्य के खिलाफ अन्य 39 चार्जशीट पर निर्णय आना अभी बाकी है।
इस तरह हुआ पर्दाफाश
दो अलग-अलग आरोप पत्रों के मुताबिक दोषी लेख राज ने 14 दिसंबर 2010 को 3 लाख रुपये और धर्मचंद ने 27 फरवरी 2011 को 5 लाख रुपये के ऋण के लिए आवेदन किया था। इसके लिए उन्होंने कथित रूप से पटवारी की जारी की गई जमाबंदी सहित केवाईसी दस्तावेज और राशन कार्ड की प्रति का हलफनामा भी दिया। इसके बाद उनके खातों में धनराशि स्थानांतरित कर दी गई। बैंक की ऑडिट रिपोर्ट में 1.83 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी सामने आई। अनुसूची घोषणा पत्र की जांच में पाया गया कि बैंक प्रबंधक एएस बोध ने तहसीलदार कुल्लू को बैंक के पक्ष में उपरोक्त भूमि पर प्रभार सृजन की आवश्यक कार्रवाई के लिए भेजा था। पटवारियों की जांच के अनुसार उक्त भूमि पर आरोपी लेख राज और धर्मचंद का स्वामित्व गलत तरीके से दर्शाया गया था।