कार्मिक विभाग के अवर सचिव की ओर से जारी पत्र में बताया कि वर्ष 1999 में जनजातीय एवं दुर्गम इलाकों में विकास असमानता को दूर करने के उद्देश्य से कठिन क्षेत्र उप कैडर का गठन किया गया था। इस व्यवस्था के तहत विभिन्न विभागों के सभी पदों/सेवाओं में एक उप कैडर बनाया गया, ताकि इन क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचा और सामाजिक सेवाओं के क्षेत्र में विशेष प्राथमिकता दी जा सके। साल 2013 और 2016 में भी राज्य सरकार ने उप कैडर को और स्पष्ट एवं पुनर्गठित किया था। विभाग ने अब पाया कि संबंधित विभाग इन निर्देशों का सही ढंग से पालन नहीं कर रहे हैं, जिसके कारण बड़ी संख्या में पद आज भी खाली पड़े हैं। इससे इन क्षेत्रों में सरकार की कई योजनाओं और कार्यक्रमों का क्रियान्वयन प्रभावित हुआ है।
कार्मिक विभाग ने स्पष्ट किया है कि किसी भी विभाग को बिना उचित प्राधिकरण / वित्त विभाग की पूर्व अनुमति के जॉब ट्रेनी नियुक्त करने की प्रक्रिया शुरू करने की अनुमति नहीं होगी। कार्मिक विभाग के अधिकारियों ने बताया कि जॉब ट्रेनी को नियमित सरकारी कर्मचारियों जैसी सुविधाएं नहीं मिलेंगी, बल्कि उन्हें केवल तयशुदा मासिक मानदेय ही दिया जाएगा। सरकार ने सभी विभागाध्यक्षों, संस्थानों और निकायों को निर्देश दिए हैं कि इन नए प्रावधानों की जानकारी संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों तक पहुंचाना सुनिश्चित करें, ताकि भविष्य में जॉब ट्रेनी नियुक्ति से संबंधित कोई भ्रम न रहे।