बागा सराहन एक दुर्गम इलाका
बागा सराहन एक ऐसा दुर्गम इलाका है, जहां गुजर-बसर करना पहाड़ जैसी चुनौती है। जिला मुख्यालय कुल्लू पहुंचने में यहां से दस घंटे लग जाते हैं। लोग कहते हैं कि कुल्लू पहुंचना यहां से बहुत नजदीक हो सकता है। अगर बशलेऊ जोत होकर बठाड के लिए सड़क बन जाए। आनी-जलोड़ी जोत सुरंग परियोजना भी बन जाए तो भी सफर काफी कम हो जाएगा। कनेक्टिविटी नहीं होने से लोगों को जिला मुख्यालय तक पहुंचने के लिए मीलों सफर पैदल तय करना होता है। जिला मुख्यालय कुल्लू के बजाय राजधानी शिमला जाना आसान और नजदीक लगता है।
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बागा सराहन में कई योजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण किया। मिल्कफेड के चेयरमैन बुद्धि सिंह ठाकुर और अन्य लोगों के प्रयासों से मुख्यमंत्री का सरकार गांव के द्वार कर्यक्रम इस दूरदराज गांव में आयोजित करना तय किया गया है। सीएम दिनभर न केवल यहां के लोगों को कई सौगात देंगे, बल्कि वह यहां की ग्राम्य जीवन शैली को बहुत करीब से देखेंगे। यहां के ग्रामीणों के घर जाकर रात्रिभोज भी करेंगे। यहां की प्रमुख पहाड़ी व्यंजन भी पर्यटन की दृष्टि से प्रचारित होंगे।
कांग्रेस की गारंटी को पूरा करने के लिए सीएम ने चुने दुर्गम गांव
कांग्रेस की गारंटी को पूरा करने के लिए भी मुख्यमंत्री ने हिमाचल प्रदेश के दुर्गम गांवों को चुना है, जहां पहुंचना ही बड़ा मुश्किल काम है। लाहौल स्पीति, डोडरा क्वार, कुपवी, बंजार आदि के बाद सीएम सुक्खू मंगलवार को बागा सराहन की करीब 1800 पात्र महिलाओं को 1500-1500 रुपये महीने का तोहफा दे रहे हैं।