भाखड़ा बांध से इन राज्यों को मिलता है पानी
भाखड़ा बांध से पंजाब, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली को पानी मिलता है। भाखड़ा बांध में हिमाचल से निकलने वाली सतलुज और ब्यास नदियों का पानी आता है। इस बार मानसून सीजन के दौरान प्रदेश में सामान्य से 11 फीसदी कम बारिश हुई है। मौसम विभाग के अनुसार अगले 24 घंटों में हिमाचल से मानसून विदा हो जाएगा। ऐसे में अब बारिश के आसार कम हैं। इस साल भाखड़ा बांध में पानी की उपलब्धता पर दो तरफ से असर पड़ा है। एक ओर बारिश कम हुई, दूसरी ओर बर्फ पिघलने से आने वाला पानी भी सामान्य से कम रहा। बीबीएमबी के मुताबिक 1977 के बाद दूसरी बार स्नो मेल्ट इतना कम रहा है। सामान्य तौर पर तापमान बढ़ने के साथ बर्फ पिघलने की रफ्तार बढ़ती है और इससे नदियों के प्रवाह में भी बढ़ोतरी होती है। आने वाले दिनों में तापमान और जलग्रहण क्षेत्रों में मौसम की स्थिति महत्वपूर्ण रहेगी। बीबीएमबी के अनुसार बहुत चिंता की कोई स्थिति नहीं है। आगे तापमान बढ़ने पर स्नो मेल्ट बढ़ने से पानी की आवक में सुधार होने की संभावना है।
भाखड़ा बांध का जलस्तर 1638.78 फीट
भाखड़ा बांध में 30 सितंबर को जलस्तर 1638.78 फीट दर्ज हुआ। पिछले साल इसी दिन यह 1673.90 फीट था। यानी इस साल जलस्तर 35.12 फीट कम है। भाखड़ा बांध में जलस्तर क्षमता 1680 फीट है। 2022 में 1672.56 फीट, 2023 में 1673.26 फीट, 2024 में 1648.11 फीट और 2025 में 1673.90 फीट जलस्तर था। इस तरह पांच साल में इस साल 30 सितंबर का जलस्तर सबसे कम है। 21 सितंबर को भाखड़ा का जलस्तर 1643.79 फीट था, जो 30 सितंबर तक घटकर 1638.78 फीट रह गया। नौ दिनों के अंतराल में 5.01 फीट की गिरावट दर्ज हुई। 30 सितंबर तक भाखड़ा में 3.78 बीसीएम पानी उपलब्ध था, जबकि पिछले साल इसी दिन 5.36 बीसीएम पानी था। यानी करीब 1.58 बीसीएम कम पानी रहा। इस साल लाइव स्टोरेज 67 फीसदी है, जबकि पिछले साल 95 फीसदी था। सामान्य औसत 87 फीसदी है। 30 सितंबर को भाखड़ा में 17,675 क्यूसेक पानी आया। पिछले साल इसी दिन 22,323 क्यूसेक आवक थी। इस तरह दैनिक आवक 4,648 क्यूसेक कम रही।
पौंग और रणजीत सागर में भी कम जलस्तर
भाखड़ा के साथ पौंग बांध और रणजीत सागर में भी इस बार जलस्तर कम है। पौंग बांध में 30 सितंबर को जलस्तर 1367 फीट रहा, जो पिछले साल के 1389.30 फीट से 22.30 फीट कम है। यहां लाइव स्टोरेज 73 फीसदी रहा, जबकि पिछले साल 99 फीसदी था। 30 सितंबर को पौंग में 5,508 क्यूसेक आवक हुई, जबकि पिछले साल 9,778 क्यूसेक थी। पंडोह में आवक 4,619 क्यूसेक रही, जबकि पिछले साल 8,758 क्यूसेक थी। रणजीत सागर में जलस्तर 505.58 मीटर रहा, जो पिछले साल के 524.36 मीटर से 18.78 मीटर कम है।
आगे बारिश और स्नो मेल्ट पर रहेगी नजर
जलाशयों में मौजूदा उपलब्धता के साथ आगे होने वाली बारिश और बर्फ पिघलने से आने वाले पानी पर नजर रहेगी। बीबीएमबी की राज्यों को हिदायत का उद्देश्य उपलब्ध पानी का अनावश्यक इस्तेमाल रोकना और गर्मियों में सिंचाई समेत जरूरी जरूरतों के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध रखना है।
इस बार कम बारिश के साथ स्नो मेल्ट से भी पानी की आवक अपेक्षाकृत कम रही है। फिलहाल चिंता जैसी कोई स्थिति नहीं है। उपलब्ध पानी को ध्यान में रखते हुए पार्टनर राज्यों से जरूरत के मुताबिक पानी का इस्तेमाल करने को कहा गया है, जिससे आगे सभी आवश्यकताओं के लिए पानी उपलब्ध रहे।-रवि मित्तल, डायरेक्टर वाटर रेगुलेशन, बीबीएमबी