हिमाचल विधानसभा की प्राक्कलन समिति ने महिला एवं बाल विकास विभाग के वित्तीय प्रबंधन, बजट निर्माण और योजनाओं के क्रियान्वयन में खामियां उजागर की हैं। समिति ने कहा कि विभाग वास्तविक जरूरतों का आकलन करने के बजाय पिछले वर्षों के खर्च को आधार बनाकर बजट अनुमान तैयार करता रहा। इससे बजट प्रावधान और वास्तविक व्यय में अंतर रहा। अग्रेतर कार्रवाई प्रतिवेदन (फर्दर एक्शन रिपोर्ट) में विधायक राकेश कालिया की अध्यक्षता वाली समिति ने विभाग को निर्देश दिया कि भविष्य में बजट तैयार करते समय जमीनी आवश्यकताओं, योजनाओं की प्रगति और उपलब्ध संसाधनों का यथार्थ आकलन किया जाए। समिति ने वित्तीय वर्ष के अंतिम महीनों में खर्च बढ़ने की प्रवृत्ति पर भी नाराजगी जताते हुए इसे वित्तीय अनुशासन के विपरीत बताया।
बाल संरक्षण एवं पुनर्वास योजनाओं की समीक्षा के दौरान समिति ने मुख्यमंत्री सुख आश्रय योजना से जुड़ी सेवाओं को समयबद्ध तरीके से ऑनलाइन करने को कहा। समिति ने कहा कि महिला एवं बाल विकास विभाग की योजनाएं महिलाओं, बच्चों, अनाथों और जरूरतमंद परिवारों जैसे संवेदनशील वर्गों से सीधे जुड़ी हैं। ऐसे में वित्तीय अनुशासन, पारदर्शिता और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन में लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती। सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने कहा कि समिति की सिफारिशों पर गंभीरता से विचार करने के लिए विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं।