सदन में संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू।
- फोटो : अमर उजाला नेटवर्क
मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने कहा कि एक साल के भीतर प्रदेश की हर पीएचसी में डॉक्टरों को उपलब्ध करवाया जाएगा। डॉक्टरों और नर्सों के पदों को सृजित किया जाएगा। चिकित्सकों का युक्तिकरण भी किया जाएगा। मेडिकल कॉलेजों में दिल्ली एम्स की तर्ज पर सुविधाएं दी जाएंगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि व्यवस्था परिवर्तन में चुनौतियां होती हैं। हम 40 साल पुरानी व्यवस्थाओं को बदल रहे हैं। आगामी 15 दिनों में पैरा मेडिकल स्टाफ का पुनर्गठन कर दिया जाएगा।
बुधवार को प्रश्नकाल के दौरान भाजपा विधायक जनकराज और रणधीर शर्मा ने स्वास्थ्य संस्थानों में रिक्त पदों का मामला उठाया। उन्होंने कहा कि प्रदेश में एमबीबीएस और बीडीएस के रिक्त पदों को कब तक भरा जाएगा। श्री नयना देवी के विधायक रणधीर शर्मा ने भी एमबीबीएस चिकित्सकों के रिक्त पदों को भरने की मांग उठाई। नेता विपक्ष जयराम ठाकुर ने कहा कि पहले कैंपस से भी वाक इन इंटरव्यू का भी प्रावधान रहा है। हमने एक साथ 500 पद सृजित किए, 300 पद भर दिए। 200 भरने की प्रक्रिया शुरू की। वर्तमान सरकार में एक भी डॉक्टर की पोस्टिंग नहीं हुई है।
इस पर स्वास्थ्य मंत्री डॉ. धनीराम शांडिल ने कहा कि सरकारें निरंतरता में होती है। सभी ने पदों को भरने के प्रयास किए हैं। मैंने तांदी में देखा था कि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी ही स्वास्थ्य संस्थान का प्रभारी था। मंत्री ने कहा कि सभी पदों को भरने की प्रक्रिया चल रही है। विपक्ष के विधायकों ने स्वास्थ्य मंत्री धनीराम शांडिल के जवाब से असंतोष जताया और उन पर प्रश्नों और अनुपूरक सवालों की बौछार की। इस पर मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश के सभी मेडिकल कॉलेजों में दिल्ली के एम्स की तर्ज पर सुविधाएं दी जाएंगी। बुजुर्गों को घर द्वार पर स्वास्थ्य सेवाएं देने का बजट में प्रावधान किया गया है। आईजीएमसी शिमला में 20-20 साल पुरानी एमआरआई की मशीनें लगी हैं। पिछली सरकार में यह नहीं बदली गईं। हम व्यवस्था परिवर्तन कर रहे हैं।