मंडी में ठियोग से सेब लेकर आए बागवान दौलत राम ने बताया कि निचले और मध्यम इलाकों वाले सेब को हर वर्ष बेहतर दाम मिलते हैं। जब ऊंचाई वाले इलाकों में सेब सीजन शुरू होता है तो दाम गिर जाते हैं। इससे बागवानों को उनकी मेहनत का पैसा नहीं मिल पाता। बागवानों का कहना है कि इस साल सेब की पैदावार फफूंद वाली बीमारियों के कारण बहुत प्रभावित हुई है। दूसरी ओर सीजन शुरू होने के बाद फसल के बेहतर दाम नहीं मिल रहे हैं। एक साल में एक पेटी के ऊपर खाद, स्प्रे से लेकर लेबर तक का करीब 750 रुपये का खर्चा आ जाता है। आढ़तियों के अनुसार इन दिनों फल मंडी में सबसे ज्यादा रेड गोल्डन रॉयल सेब की खेप पहुंच रही है। गोल्डन, स्पर और गाला सेब भी मंडी में आ रहा है। फल मंडी में शुक्रवार को दस से 12,000 पेटी नाशपाती और 15 से 20 हजार पेटी सेब पहुंचा।
फल मंडी में एक हफ्ते में सेब और नाशपाती की आवक में बढ़ोतरी देखने को मिली है। जिसके चलते दामों में गिरावट आ गई है। सबसे अच्छा राॅयल 2,200 से 2700 रुपये प्रतिपेटी तक बिक रहा है। इसके अलावा स्पर के दामों में गिरावट आ गई है। - प्रताप चौहान, प्रधान, फल मंडी आढ़ती एसोसिएशन