छात्रवृति घोटाला (सांकेतिक तस्वीर)।
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हिमाचल में बहुचर्चित छात्रवृति घोटाले के एक आरोपी ने जिला अदालत शिमला के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने 25 मार्च के आदेश के तहत आरोपी कृष्ण कुमार को चार सप्ताह में अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण के निर्देश दिए थे। विशेष न्यायाधीश दविंदर कुमार की अदालत ने आरोपी को 20 मई तक न्यायिक हिरासत में भेजने के आदेश दिए हैं। आरोपी कृष्ण कुमार (42) सिरसा, हरियाणा का रहने वाला है। इसने प्रवर्तन निदेशालय में धन शोधन निवारण अधिनियम की धारा 4 के तहत साल 2019 के मामले में आत्मसमर्पण किया है।
दरअसल, 16 नवंबर 2018 को उच्च शिक्षा विभाग के राज्य परियोजना अधिकारी की शिकायत पर छोटा शिमला थाना में एफआईआर दर्ज की गई थी। इसमें राज्य के अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति/अन्य पिछड़ा वर्ग/अति पिछड़ा वर्ग के विद्यार्थियों को केंद्रीय और राज्य प्रायोजित योजनाओं के तहत प्री-मैट्रिक और पोस्ट मैट्रिक छात्रवृत्ति के वितरण के संबंध में वित्तीय अनियमितताओं के आरोप लगे थे। 20 मार्च 2019 की अधिसूचना के मद्देनजर पुलिस ने मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी थी।
मई 2019 में आईपीसी की धारा 409, 420, 467, 468, 471, 120-बी और भ्रष्टाचार अधिनियम की धारा 13(1)(सी), 13(1)(डी) और 13(2) के तहत मामला पंजीकृत किया गया। प्रवर्तन निदेशालय ने धन शोधन अधिनियम के प्रावधानों के तहत जांच शुरू की। ईडी ने 22 जुलाई 2019 को याचिकाकर्ता कृष्ण कुमार सहित अन्य व्यक्तियों के विरुद्ध मामला दर्ज किया। याचिकाकर्ता पर आरोप है कि उसने छात्रों को प्रवेश दिए बिना छात्रवृत्ति का दावा किया था। उधर, 25 मार्च को आरोपी ने सर्वोच्च न्यायालय में जमानत याचिका दायर की थी। लेकिन सर्वोच्च न्यायालय ने जमानत याचिका खारिज करते हुए आरोपी को चार सप्ताह के भीतर अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण करने के आदेश दिए थे।