जनहित याचिका में बताया गया है कि भांगवाड़ से कांगड़ा बाईपास तक पूरे रास्ते का टोल वसूला जा रहा है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि इस रूट पर न तो टनल शुरू हुई है और न ही कछारी को जोड़ने वाला पुल बनकर तैयार हुआ है। आरोप लगाया गया है कि जब वाहन चालकों को पूरे फोरलेन मार्ग और उससे जुड़ी सुविधाओं का लाभ ही नहीं मिल रहा है, तो उनसे पूरा टोल वसूलना सरासर गलत है। यह आम जनता की जेब से बेवजह पैसे निकालने जैसा है।
याचिका में बताया कि इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों को पहले ही ज्ञापन सौंपा गया था, लेकिन उस पर कोई कदम नहीं उठाया गया। अदालत के सामने निर्माणाधीन कार्यों की तस्वीरें और रूट का पूरा नक्शा भी सबूत के तौर पर पेश किया गया। मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने केंद्र सरकार और प्रदेश सरकार को नोटिस जारी किया है। अन्य संबंधित पक्षों को तीन दिन के भीतर नोटिस जारी करने के निर्देश दिए गए हैं। इस मामले की अगली सुनवाई 16 नवंबर को होगी।