खंडपीठ ने मामले के तथ्यों और शिक्षा विभाग के नियमों की जांच करने के बाद अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता पिछले 10 वर्षों से केवल जिला सिरमौर के भीतर ही अलग-अलग स्टेशनों पर सेवाएं दे रहा था। वह पावंटा साहिब, अजौली और शिवपुर जैसे स्टेशनों पर महज 8 से 10 किलोमीटर के दायरे में ही घूमता रहा। अदालत ने शिक्षा विभाग के 27 अक्तूबर 2023 के उस कार्यालय ज्ञापन को सही ठहराया, जिसके तहत 30 किलोमीटर के दायरे के भीतर बिताए गए समय को एक ही स्टेशन का ठहराव मानकर कुल कार्यकाल की गणना की जाती है।
खंडपीठ ने कहा कि यह व्यवस्था इसलिए की गई है, जिससे शिक्षा विभाग के कर्मचारी ट्रांसफर नीति का दुरुपयोग न कर सकें और चालाकी से एक ही क्षेत्र के भीतर तीन साल से अधिक समय तक न टिके रहें। अदालत ने अपीलकर्ता की याचिका को सिरे से खारिज कर दिया। अपीलकर्ता का तबादला 27 अप्रैल 2026 को जिला सिरमौर के ही राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शिवपुर से कफोटा कर दिया गया था। याचिकाकर्ता ने इस आदेश को इस आधार पर चुनौती दी थी कि शिवपुर में उनका कार्यकाल केवल 11 महीने का ही हुआ था। इसलिए उन्हें इतनी जल्दी नहीं बदला जा सकता।