न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की अदालत ने कहा कि किन्नौर कैलाश यात्रा 1 से 30 जुलाई तक प्रस्तावित है, इसे नियमानुसार जारी रखा जाए। राज्य सरकार और उपायुक्त, एसडीएम और एसपी यह सुनिश्चित करें कि यात्रा बिना किसी रुकावट और सभी सुरक्षा मानकों के साथ चलती रहे। अदालत ने अपने फैसले में मुख्य टिप्पणी करते हुए कहा कि ग्राम पंचायत पोवारी के पास कानूनन ऐसा कोई अधिकार या शक्ति नहीं है कि वह अधिनियम के तहत पंजीकृत किसी सहकारी संस्था या सोसायटी को भंग कर सके। किन्नौर कैलाश यात्रा अनादि काल से आयोजित की जा रही है और इसमें देश भर से विभिन्न क्षेत्रों व धर्मों के श्रद्धालु हिस्सा लेते हैं। यात्रा को आयोजित करने का निर्णय राज्य सरकार की ओर से 12 जून 2026 को आयोजित उच्च स्तरीय समिति की बैठक में लिया गया था। ऐसे में किसी ग्राम पंचायत की ओर से इसे रोकने का आदेश कानूनी रूप से मान्य नहीं है।
यह है मामला
बता दें कि यह विवाद पोवारी ग्राम पंचायत की ओर से 13 जुलाई को पारित एक प्रस्ताव के बाद शुरू हुआ था। ग्राम सभा की एक विशेष बैठक में 112 लोगों ने यात्रा का विरोध किया था, जबकि 62 लोगों ने यात्रा जारी रखने के पक्ष में हस्ताक्षर किए थे। बहुमत का हवाला देते हुए ग्राम पंचायत पोवारी ने किन्नौर कैलाश यात्रा को हमेशा के लिए बंद करने का प्रस्ताव पारित कर दिया और साथ ही यात्रा का प्रबंधन करने वाली पंजीकृत सोसायटी को भी भंग करने का आदेश जारी कर दिया। पंचायत के इस सांविधानिक फैसले के खिलाफ पंजीकृत सोसायटियों ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की।