अभी राज्य के कई मेडिकल कॉलेजों में पुरानी मशीनों से मरीजों के टेस्ट किए जा रहे हैं। कुछ जगहों पर करीब 20 साल पुरानी मशीनों से जांच होने के कारण व्यवस्था को आधुनिक बनाने की जरूरत महसूस की जा रही है। नई तकनीक लागू होने से मरीजों को बेहतर जांच सुविधाएं उपलब्ध कराने और प्रयोगशालाओं की कार्यक्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी। इसके साथ ही लैब संचालन के लिए तकनीशियनों की भर्ती प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।
स्वचालित प्रक्रिया से कम होंगी जांच में गलतियां
ऑटोमेशन लैब में आधुनिक उपकरणों की मदद से सैंपल की जांच के कई चरण स्वचालित तरीके से पूरे किए जा सकेंगे। इससे जांच प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित होगी और मानवीय हस्तक्षेप कम होने से सैंपल की पहचान, जांच और रिपोर्ट तैयार करने में संभावित गलतियों को कम करने में सहायता मिलेगी। बड़ी संख्या में मरीजों के सैंपल की जांच करना भी पहले के मुकाबले आसान हो सकेगा। एक ही सैंपल से कई तरह की जांच संभव होने पर मरीजों को राहत मिलेगी।
मेडिकल कॉलेजों में आधुनिक सुविधाएं विकसित होने से मरीजों को बेहतर जांच सेवाएं उपलब्ध करवाने में मदद मिलेगी। इससे सरकारी अस्पतालों में जांच व्यवस्था की गुणवत्ता बढ़ेगी और मरीजों को बड़े चिकित्सा संस्थानों जैसी सुविधाएं देने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा। -आशीष सिंहमार, स्वास्थ्य सचिव